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Article 370 हटने के सात साल पूरे, जानें कितना बदल गया कश्मीर

Kashmir post 370 development: 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी, बंद और आतंकी घटनाओं में बड़ी कमी आई है। सात साल बाद घाटी की नई पीढ़ी डर और बंद की यादों से आगे बढ़कर पढ़ाई, करियर और कारोबार पर ध्यान दे रही है।
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Aug 05, 2026
Kashmir youth change
कश्मीर में आर्टिकल 370 हटने के सात साल पूरे हुए (Photo-Patrika)

Kashmir After Article 370: 5 अगस्त 2019 एक तारीख, जिसने जम्मू-कश्मीर का राजनीतिक नक्शा बदल दिया। अनुच्छेद 370 हटने के सात साल बाद अब घाटी की तस्वीर भी पहले जैसी नहीं दिखती। कभी हर शुक्रवार बंद, प्रदर्शन और पत्थरबाजी की आशंका रहती थी। हवा में गंधक और पोटाश की गंध घुली रहती थी, सड़कों पर सन्नाटा पसरा होता था। आज वही घाटी सामान्य दिनचर्या जी रही है। वुलर झील का पानी पहले से अधिक साफ दिखता है और 90 के दशक का आतंकवाद, लंबे बंद और लगातार प्रतिबंध नई पीढ़ी के लिए सुनी-सुनाई कहानी बनते जा रहे हैं। जिस समय अनुच्छेद 370 हटा था, तब स्कूल जाने वाले बच्चे आज कॉलेजों में हैं और उनके सपनों की दिशा बदल चुकी है।

लोगों ने क्या कहा?

हब्बाकदल के 19 वर्षीय साहिल कहते हैं, पहले पढ़ाई से ज्यादा चिंता यह रहती थी कि स्कूल खुलेगा भी या नहीं। मोबाइल नेटवर्क कब बंद हो जाए, कोई भरोसा नहीं था। अब हमारी बातचीत बंद और पत्थरबाजी पर नहीं, एआइ, इंजीनियरिंग और करियर पर होती है। अम्मी-अब्बा जिस कश्मीर की बातें बताते हैं, हम उसे सिर्फ उनकी यादों में जानते हैं।

डाउनटाउन के सौरा की एमबीबीएस छात्रा सुमायरा की मुस्कान भी बदलाव की गवाही देती है। वह कहती हैं, 370 सही था या गलत, यह फैसला इतिहास करेगा। इतना जरूर है कि अब पढ़ाई बीच में नहीं रुकती। पहले घर से निकलते समय अम्मी की आंखों में डर होता था। लाल चौक जाना भी आसान नहीं था। अब हम बिना डर दोस्तों के साथ वहां बैठते हैं, कॉफी पीते हैं और भविष्य की बातें करते हैं।

ईदगाह के वाहिद की कहानी भी बदलते कश्मीर की तस्वीर है। कभी बंद और प्रतिबंधों के बीच पढ़ाई करने वाले वाहिद आज फूड स्टार्टअप चला रहे हैं। तीन साल में श्रीनगर में तीन आउटलेट खोल चुके हैं। उनका कहना है कि दिल्ली से सीधी रेल सेवा शुरू होने के बाद सामान कम लागत में मिलने लगा है, जिससे कारोबार को नई रफ्तार मिली है।

घाटी के इतिहास और राजनीति पर बहस आगे भी होती रहेगी, लेकिन आज की युवा पीढ़ी की आंखों में एक अलग चमक दिखाई देती है। जिन हाथों में कभी बंद के कैलेंडर थे, वे अब प्रवेश परीक्षाओं की किताबें, लैपटॉप और कारोबार की योजनाएं थामे हैं। कश्मीर की यह नई पीढ़ी अतीत से ज्यादा आने वाले कल को लिखने में व्यस्त नजर आती है। 

बदल गई आतंक की तस्वीर

जम्मू-कश्मीर पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2009 से 4 अगस्त 2019 के बीच 1,435 आतंकी घटनाएं दर्ज हुई थीं। उस दौरान 382 नागरिकों और 672 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी, जबकि 1,827 आतंकवादी मारे गए थे।

वहीं 5 अगस्त, 2019 से 1 अगस्त, 2026 के बीच केंद्र शासित प्रदेश में 652 आतंकी घटनाएं दर्ज की गईं। इस अवधि में 191 नागरिकों और 213 सुरक्षा कर्मियों की जान गई, जबकि 858 आतंकवादी मारे गए।

साल 2022 से 2025 के बीच आतंकी घटनाओं में 77 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस दौरान घटनाओं की संख्या घटकर 35 रह गई। सुरक्षा अभियानों में मारे गए आतंकवादियों की संख्या 193 से घटकर 46 हो गई, जबकि शहीद होने वाले सुरक्षा बलों के जवानों की संख्या 30 से घटकर 17 रह गई।

शून्य हुई पत्थरबाजी

साल 2018 में जम्मू-कश्मीर में 1,328 संगठित पत्थरबाजी की घटनाएं, 52 संगठित बंद और 228 आतंकी घटनाएं दर्ज हुई थीं। 2023 तक संगठित पत्थरबाजी और बंद की घटनाएं शून्य पर पहुंच गईं। हालांकि 2025 के पहलगाम आतंकी हमले ने यह भी दिखाया कि आतंकवाद की चुनौती पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

Updated on:
05 Aug 2026 12:17 pm
Published on:
05 Aug 2026 12:17 pm