23 सितंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

विपक्ष के सीधे निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, तेजस्वी यादव बोले- हमने सबसे पहले आगाह किया था

Election Commission of India: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्ष के निशाने पर हैं। मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद तेजस्वी यादव ने भी निशाना साधा है।
3 min read
Google source verification
tejashwi yadav on jamui viral video

तेजस्वी यादव(फोटो-ANI)

ECI internal dispute: चुनाव आयोग ने जून 2025 में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के तहत वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया शुरू की थी। अब तक देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तहत 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं। इसे लेकर विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, अब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्ष के सीधे निशाने पर हैं। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए निशाना साधा है।

बिहार से शुरू हुई एकपक्षीय दोषपूर्ण 𝐒𝐈𝐑 शुरू

राजद विधायक तेजस्वी यादव ने एक्स पर लिखा कि 𝟐𝟕 जून 𝟐𝟎𝟐𝟓 को बिहार चुनाव से चंद दिन पहले एकपक्षीय दोषपूर्ण 𝐒𝐈𝐑 शुरू करने पर हमने सर्वप्रथम देश को आगाह किया था। हमने 𝟏𝟓 से अधिक बार तार्किक रूप से तथ्यों व सबूतों के साथ दोषपूर्ण और द्वेषपूर्ण 𝐒𝐈𝐑 प्रक्रिया पर प्रजेंटेशन देकर जनता और मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा था। वोट चोरी को उजागर करने के लिए सर्वप्रथम बिहार में वोटर अधिकार यात्रा निकाली।

ज्ञानेश कुमार ने की मनमानी

उन्होंने आगे लिखा कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो आयुक्तों ने 𝟏𝟎 महीनों में 𝟏𝟒 बार चुनाव आयोग के निर्णयों व नीतियों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। यहां तक की एक दिन में 𝟒 बार आपत्तियां दर्ज करा इनके निर्णयों को अनधिकृत और अवैध बताया, लेकिन बहुमत को दरकिनार करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जबरन मनमानी की, ताकि बीजेपी को फायदा पहुंचे। दो शीर्ष लोगों के अनैतिक, अवैधानिक कुकृत्यों एवं निर्देशों की पालना कर लोकतंत्र और संविधान खत्म करने पर आमादा ज्ञानेश कुमार को कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उन्हें विश्वास दिलाया गया है कि उन्हें बचा लिया जाएगा।

वोट चोरी को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट तक गए, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग के संवैधानिक संस्था का मुखिया होने के नाते हर बार तमाम सवैधानिक परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और मर्यादाओं को तार-तार कर सबको गुमराह किया।

चुनावी दिन तक बांटे गए रुपए

बिहार चुनाव से पूर्व हमारा डेलीगेशन इनसे मिला, विपक्ष का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल मिला, प्रमाण दिए, दोषपूर्ण और द्वेषपूर्ण 𝐒𝐈𝐑 प्रक्रिया के साक्ष्य दिए, अनेक पत्र लिखे, मृत बताकर काटे गए मतदाताओं को जिंदा सुप्रीम कोर्ट में खड़ा किया, चुनावों में मतदान के दिन तक सरकार द्वारा मतदाताओं को 𝟒𝟏 हजार करोड़ की बड़ी धनराशि के वितरण अथवा बीजेपी शासित प्रदेशों के अधिकारियों को ऑब्ज़र्वर एवं उन राज्यों की पुलिस की चुनावी ड्यूटी तथा 𝐏𝐌 समेत बीजेपी नेताओं द्वारा आचार संहिता के सरेआम उल्लंघन पर अनेक बार आपत्तियां दर्ज कराई लेकिन कभी भी एक भी आपत्ति पर सुनवाई नहीं हुई।

मैंने पूर्व में भी कहा और निरंतर कह रहा हूं, हमें तंत्र और यंत्र से चुनाव हराया गया। हम हारे नहीं हराया गया। बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और बंगाल इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। पूरी चुनाव प्रक्रिया अब 𝐄𝐲𝐞 𝐰𝐚𝐬𝐡 बनकर रह गयी है। अभी तो ऐसे खुलासों की शुरुआत हुई है। समय आने पर जो भी इन अनैतिक गैर-संवैधानिक कुकृत्यों में सम्मिलित रहे है वो ही इनकी पोल खोलेंगे। हमने भी बहुत कुछ संभाल कर रखा है, इंतजार करते रहिए।

मनोज झा ने भी बोला सीईसी पर हमला

इस मामले पर राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने एक्स पर लिखा कि जब चुनाव आयोग के भीतर से ही वोटर लिस्ट को कंट्रोल करने के बारे में सवाल उठते हैं, तो उन्हें सिर्फ़ एक अंदरूनी प्रक्रिया का मामला कहकर नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता और लोकतंत्र की विश्वसनीयता एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। यह बात बहुत चिंताजनक है कि जब लोकतंत्र की रखवाली करने वाली संस्था ही ऐसी लगने लगे, मानो वह उसी लोकतंत्र को नुकसान पहुँचा रही है जिसकी रक्षा करना उसका काम है।

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग