
ECI-SIR विवाद पर बीजेपी की आई प्रतिक्रिया (File Photo)
Election Commission: चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में खुलासे के बाद विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार पर निशाना साधा है। अब इसके बाद बीजेपी की तरफ से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। बीजेपी नेता राम कदम ने बयान देते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, इसे राजनीति का अड्डा नहीं बनना चाहिए। फर्जी मतदाता नहीं होने चाहिए और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में 10 बार दर्ज है, या फर्जी नाम दर्ज किए गए हैं, तो क्या ऐसे नामों को हटाना जरूरी नहीं है? लंबे समय से ऐसा होता आया है, जिसमें लोग फर्जी मतदान करते रहे हैं। एक मजबूत लोकतंत्र के लिए फर्जी मतदाताओं के नाम हटाना और वास्तविक मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना जरूरी है। SIR का उद्देश्य बस इतना ही है। अगर विपक्ष इसको लेकर आरोप-प्रत्यारोप करना चाहता है, तो उसके पास इसका क्या तर्क है?
इस मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार गुप्ता एक ऐसे दीमक हैं, जिन्हें बीजेपी पाल-पोस रही है और संरक्षण दे रही है, ताकि चुनाव आयोग को भीतर से खोखला किया जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि यह पहले से ही पता था कि चुनाव आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। लेकिन हालात कितने उलझे हुए, अव्यवस्थित और परेशान करने वाले हो गए हैं, इसे इंडियन एक्सप्रेस की इस शानदार पड़ताल ने उजागर कर दिया है।
ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए खेड़ा ने कहा कि इस प्रक्रिया में उन्होंने बीजेपी के इशारे पर भारत की चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को अकेले ही तबाह कर दिया है।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा सवाल और संदेह उठाए गए थे और कांग्रेस ने मतदाता सूचियों को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष कई आपत्तियां दर्ज कराई थीं। अब यह रिपोर्ट SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) में मौजूद खामियों के बारे में और जानकारी सामने लाती है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा उन राज्यों में शामिल हैं, जहां चुनावी डेटाबेस की विश्वसनीयता को लेकर चिंताएं उठाई गई हैं। चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया पर भी आपत्तियां उठाई गई थीं, खासकर तब जब मुख्य न्यायाधीश (CJI) की भूमिका को चयन समिति से हटा दिया गया था।
पायलट ने कहा कि बीजेपी ने अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संस्थाओं को कमजोर किया है। चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इस प्रक्रिया और डेटाबेस की जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
Updated on:
23 Sept 2026 12:18 pm
Published on:
23 Sept 2026 11:05 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
