राष्ट्रीय

दुबई में फंसे भारतीय! पासपोर्ट छीने, वेतन रोका और अब मिल रही धमकियां

मजदूरों के अनुसार, उन्हें ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद 1600 दिरहम (लगभग 36,000 रुपये) मासिक वेतन का वादा किया गया था। कंपनी ने वादा किया था कि फ्लाइट टिकट, वीजा, खाना और आवास का खर्च वह उठाएगी।
2 min read
Feb 02, 2026
jharkhand-workers
jharkhand-workers

संयुक्त अरब अमीरात के दुबई में झारखंड के 14 प्रवासी मजदूर गंभीर संकट में फंसे हुए हैं। गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जिलों के ये मजदूर ईएमसी इलेक्ट्रोमैकेनिकल कंपनी एलएलसी कंपनी में ट्रांसमिशन लाइन के काम पर गए थे, लेकिन कंपनी द्वारा वादा किए गए वेतन न देने, पासपोर्ट जब्त करने और निष्कासन की धमकी देने से वे भूखे-प्यासे और बेघर हो गए हैं। मजदूरों ने एक वीडियो सोशल एक्टिविस्ट सिकंदर अली को भेजा है, जिसमें उन्होंने अपनी दयनीय हालत बताई और झारखंड सरकार से सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है।

कंपनी ने किए थे ये वादे

मजदूरों के अनुसार, उन्हें ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद 1600 दिरहम (लगभग 36,000 रुपये) मासिक वेतन का वादा किया गया था। कंपनी ने वादा किया था कि फ्लाइट टिकट, वीजा, खाना और आवास का खर्च वह उठाएगी। लेकिन दुबई पहुंचने के बाद स्थिति बदल गई। अब उन्हें सिर्फ 1000 दिरहम दिए जा रहे हैं, जिसमें से हर महीने 1000 दिरहम एयर टिकट के नाम पर और 50 दिरहम आवास के लिए काट लिए जाते हैं। हजारीबाग के 32 वर्षीय दीपक कुमार ने कहा कि हमसे एक पुराने कर्मचारी ने संपर्क किया था, जो कंपनी के साथ लंबे समय से काम कर रहा था। उसने हमें भरोसा दिलाया कि सब कुछ कंपनी संभालेगी। लेकिन यहां आने के बाद सब बदल गया।

न खाना है न पैसा… मालिक ने बनाया बंधक

बोकारो के दलेश्वर महतो ने बताया कि कैंप सुपरवाइजर ने पिछले रात फिर आकर 5000 दिरहम मांगे और न देने पर निष्कासन की धमकी दी। जब हमने काम छोड़कर घर लौटने की बात कही, तो पासपोर्ट नहीं लौटाए गए। हम अब लोकल दुकानों से उधार लेकर खाना खा रहे हैं। हम काम नहीं करेंगे जब तक पूरा वेतन नहीं मिलेगा। राजेश कुमार ने कहा कि कंपनी मैनेजर ने फोन पर सब संभालने का वादा किया था, लेकिन यहां आकर सब उलट-पुलट हो गया। हम वापस जाना चाहते हैं।

एचआर ने भी खड़े कर दिए हाथ

कंपनी के एजेंट घनश्याम महतो का दावा है कि टिकट का खर्च पहले कंपनी ने दिया था, जिसकी कटौती हो रही है, और बेसिक सैलरी मिल रही है। कंपनी के HR अधिकारी मंजूनाथ नागवी ने कहा कि मजदूर काम नहीं करना चाहते और कंपनी ने दो साल के वीजा पर निवेश किया है, इसलिए एक महीने में वापस भेजना संभव नहीं।

झारखंड लेबर डिपार्टमेंट के स्टेट माइग्रेंट वर्कर्स कंट्रोल रूम की प्रमुख शिखा ने बताया कि शिकायत मिली है और इसे वेरिफाई करने के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी। सोशल एक्टिविस्ट सिकंदर अली ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है।

Updated on:
02 Feb 2026 10:45 pm
Published on:
02 Feb 2026 07:28 pm