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अभिजीत दीपके को अमेरिका-आशुतोष रांका को पाकिस्तान से मिला पैसा, SIR विरोधी अभियान पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का आरोप

SIR controversy: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि एसआइआर के खिलाफ चल रहे अभियान को विदेश से आर्थिक मदद मिल रही है। उन्होंने अभिजीत दीपके और आशुतोष रांका का नाम लेते हुए उनकी फंडिंग के स्रोतों की जांच की मांग की।
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Updated: 3 Nov 2026, 8:58 PM IST
SIR controversy
अभिजीत दीपके-आशुतोष रांका। फोटो- पत्रिका

Jitendra Singh: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि देश में एसआइआर के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को विदेशी संगठनों और पाकिस्तानी नेताओं से वित्तीय मदद मिल रही है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को अमेरिका से और आशुतोष रांका को पाकिस्तान से पैसा मिला है। संवाददाताओं से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कुछ विदेशी वित्तपोषित गैर-सरकारी संगठन, कथित भारत-विरोधी संगठन और अन्य समूह एसआइआर के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हैं।

जांच की आवश्यकता पर जोर दिया

उन्होंने कहा कि एसआइआर विरोधी अभियान में शामिल एक महिला को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी धन मिल रहा था। उन्होंने संबंधित संगठनों के वित्तीय स्रोतों और संसाधनों की जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। जितेंद्र सिंह ने कहा कि खुफिया सूचनाओं और उपलब्ध आंकड़ों से तीन बातें सामने आती हैं। एसआइआर के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है, अभियान चलाने वालों की विश्वसनीयता और फंडिंग के स्रोतों की जांच होनी चाहिए और जनता के बीच गलत धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग चुनाव में सफलता नहीं मिलने पर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर अपना अभियान आगे बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर शिक्षा और परीक्षा में अनियमितताओं के मुद्दे पर चुनिंदा राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि पंजाब में नीट और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस उतनी सक्रिय क्यों नहीं है। उन्होंने कपिल सिब्बल के पुराने बयान का भी हवाला दिया, जिसमें एसाइआर को एक नियमित प्रक्रिया बताया गया था।

मतदाताओं के नाम बेवजह नहीं हटाए

कांग्रेस की ओर से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप पर जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह आंकड़ा अलग-अलग श्रेणियों को मिलाकर तैयार किया गया है। इनमें से 6.03 करोड़ मतदाता अपना निवास स्थान बदल चुके थे। करीब 3 करोड़ मतदाताओं का पता नहीं चल पाया। लगभग 2.80 करोड़ मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी। शेष मामलों में दोहरी प्रविष्टियां शामिल थीं। कर्नाटक में ही 7.10 लाख मतदाताओं के नाम दो जगह, जबकि 24.17 लाख मृत मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची में दर्ज थे। एसआइआर को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस सत्ता में है, वहां पार्टी इस प्रक्रिया को सही मानती है, जबकि अन्य राज्यों में इसका विरोध करती है।

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3 Nov 2026, 8:58 PM IST
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