
JSSC CGL Exam: झारखंड हाईकोर्ट में JSSC CGL परीक्षा के विज्ञापन को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले में अदालत के आदेश का इंतजार है। इस मामले में लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। वहीं, JPSC से जुड़े मामलों की सुनवाई अभी जारी है और इन पर शुक्रवार को सुनवाई होने की संभावना है।
JSSC CGL मामले की सुनवाई गुरुवार सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत के सामने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने जवाबी हलफनामा पढ़ते हुए परीक्षा से जुड़े विवाद और सरकार की ओर से अब तक की गई कार्रवाई के बारे में अदालत को जानकारी दी। राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि JSSC CGL समेत संबंधित परीक्षाओं के विज्ञापन रद्द करने का फैसला जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है।
सरकार ने बताया कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मामले की जांच CID कर रही है और यह जांच अभी जारी है। सरकार के अनुसार, जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए ही परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने का निर्णय लिया गया।
सरकार की ओर से करीब 12:15 बजे तक दलीलें रखी गईं। इसके बाद मामले में हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अदालत के सामने अपना पक्ष रखा गया। हस्तक्षेपकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट और अलग-अलग हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए परीक्षा रद्द करने की सरकार की कार्रवाई का समर्थन किया।
सुनवाई के दौरान JSSC CGL परीक्षा की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोपों का जिक्र किया गया। इसी क्रम में अभय तिवारी और उनके परिवार के सदस्यों की नियुक्ति से जुड़े सवाल भी अदालत के सामने उठाए गए। हालांकि, ये आरोप और दलीलें मामले की न्यायिक सुनवाई का हिस्सा हैं। अदालत ने अभी इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने JSSC CGL मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत का आदेश आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर न्यायिक स्थिति क्या रहती है।