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JSSC CGL परीक्षा रद्द होने पर पूर्व कर्मचारी का फूटा गुस्सा, बोले- आरोप साबित हों तो यहीं फांसी दे दीजिए

Jharkhand Govt Recruitment Case: झारखंड हाईकोर्ट ने 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। चार याचिकाओं में सफल अभ्यर्थियों ने बिना व्यक्तिगत जांच और सुनवाई के परीक्षा व नियुक्तियां रद्द करने को प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताया था।
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Aug 20, 2026
jharkhand student protest
झारखंड में प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विधानसभा मार्च किया था (Photo-IANS)

Jharkhand Recruitment Dispute: झारखंड हाईकोर्ट से गुरुवार को सोरेन सरकार को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश सरकार की ओर से 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले को लेकर दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। दरअसल, सरकार ने सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आई कथित अनियमितताओं के आधार पर इन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था।

हमारे खिलाफ आरोप साबित करें- पूर्व कर्मचारी

JSSC, CGL परीक्षा कैंसिल होने के विरोध में एक पुराने कर्मचारी ने कहा कि अब हम क्या करेंगे? हमें आरोपी बनाया जा रहा है, हमसे कहा जा रहा है कि हमने पैसे देकर नौकरी पाई है और हमने क्वेश्चन पेपर लीक किया है। तो, अगर आप हम पर आरोप लगा रहे हैं, तो हमारे खिलाफ ये आरोप साबित करें और हमें यहीं फांसी पर लटका दें। 

उन्होंने आगे कहा कि हम तैयार हैं, अगर हम गलत हैं। अगर हमने पैसे देकर नौकरी पाई है या अगर हमने क्वेश्चन पेपर लीक किया है, तो हमें फांसी पर लटका दें। हमें कोई दिक्कत नहीं है। 

एक अन्य पुराने कर्मचारी ने कहा कि हम इंसाफ मांग रहे हैं। अगर सरकार हमारी बात नहीं सुन रही है, अगर वे हमें इंसाफ नहीं दे रहे हैं, तो हम क्या कर सकते हैं? जांच होनी चाहिए, आपकी अपनी एजेंसियां ​​और अपना सिस्टम है। जांच कराइए, हर कोई जांच के लिए तैयार है। 

चार याचिकाओं के जरिए फैसले को दी गई चुनौती

राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में चार याचिकाएं दायर की गई थीं। इनमें 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।

अभ्यर्थियों ने उठाया प्राकृतिक न्याय का मुद्दा

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि राज्य सरकार ने उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना परीक्षाओं और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को एकतरफा तरीके से रद्द कर दिया। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थी पहले ही सरकारी सेवा में योगदान दे चुके हैं और सरकार के फैसले से उनकी नौकरी सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।

याचिका में अभ्यर्थियों ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार की भूमिका परीक्षा में कथित गड़बड़ी में पाई जाती है तो उसके खिलाफ व्यक्तिगत स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन किसी अनियमितता के आधार पर सभी सफल अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है, खासकर तब जब प्रत्येक अभ्यर्थी के खिलाफ अलग-अलग जांच नहीं की गई हो।

मेरिट के आधार पर चयन और नियुक्ति का दावा

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षाएं दीं, मेरिट सूची में स्थान हासिल किया और इसके बाद नियमों के अनुसार सरकारी पदों पर नियुक्त हुए। ऐसे में बिना व्यक्तिगत जांच और सुनवाई के उनकी नियुक्तियां समाप्त करना न्यायसंगत नहीं है।

Updated on:
20 Aug 2026 04:59 pm
Published on:
20 Aug 2026 04:59 pm