
Yashwant Varma Cash Row: पूर्व जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास से मिली जली हुई नकदी के मामले में लोकसभा की जांच समिति की रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को मामले में दोषी पाया गया है। समिति ने कहा कि वह घर में मिली बड़ी मात्रा में नकदी की मौजूदगी, स्रोत और मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की तरफ से बनाई गई तीन सदस्यीय समिति ने मई में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। यह रिपोर्ट बुधवार को संसद के दोनों सदनों में पेश की गई।
मामला 14 मार्च 2025 की रात सामने आया था। जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में जले हुए 500 रुपये के नोट मिले थे। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि स्टोर रूम में बड़ी मात्रा में ऐसी नकदी मिली, जिसका कोई स्पष्ट हिसाब नहीं था। जस्टिस वर्मा नकदी के स्रोत और उसके मालिकाना हक को लेकर संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
समिति ने स्टोर रूम की जांच को लेकर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टोर रूम को कानूनी तरीके से सील करने और जांच करने से पहले वहां मौजूद सबूतों की स्थिति बदल गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि बाद में वहां से नकदी का उपलब्ध नहीं होना भी स्पष्ट नहीं किया जा सका। समिति ने इस पहलू को भी अपनी जांच में शामिल किया।
कैश मिलने के मामले के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि, वह बाद में इस्तीफा दे चुके हैं। इसलिए उनके खिलाफ चल रही हटाने की प्रक्रिया अब प्रभावी नहीं रह गई है।
विवाद के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से उनके मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया था। उनका इस्तीफा अभी तक कानून मंत्रालय की ओर से अधिसूचित नहीं किया गया है। समिति ने रिपोर्ट में मामले में कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई पर विचार करने की बात भी कही है।