
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट (इमेज सोर्स: ANI एक्स)
Jairam Ramesh Great Nicobar: केंद्र सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जारी ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर चल रही सुनवाई को रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिककर्ताओं ने आरोप लगाया है कि 92,000 करोड़ रुपये की ग्रेट निकोबार परियोजना के लिए वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
दरअसल, 6 मई को हाईकोर्ट ने याचिकाओं पर केंद्र की प्रारंभिक आपत्तियों को खारिज कर दिया था। केंद्र सरकार का तर्क था कि याचिकाकर्ता गुप्ता अदालत आने का अधिकार नहीं है। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की पीठ ने इस दलील को अस्वीकार्य करते हुए अंतिम सुनवाई का रास्ता साफ कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) में केंद्र ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के जरिए हाई कोर्ट के आदेश और लंबित कार्यवाही पर रोक की मांग की है। इस पर कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है।
जयराम रमेश ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के ऐलान से ही केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते आ रहे हैं। उन्होंने मोदी सरकार के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाए जाने पर ट्वीट कर कहा कि सरकार परियोजना को बुलडोजर की तरह आगे बढ़ा रही है। पर्यावरण और वन कानूनों के तहत दी गई तमाम मंजूरियां गहरी खामियों से भरी हैं। प्रभाव आकलन रिपोर्टें पहले से तय नतीजों के हिसाब से बनाई गई हैं और उनकी विश्वसनीयता संदिग्ध है।
उन्होंने आगे कहा कि उम्मीद की एक हल्की किरण उन पांच अलग-अलग याचिकाओं से दिखती है, जो जनहित में काम करने वाले नागरिकों और नागरिक समाज संगठनों ने दायर की हैं और कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित हैं। इनमें से एक याचिका वन अधिकार अधिनियम, 2006 के गंभीर उल्लंघनों से जुड़ी है, जिसका असर स्थानीय आदिवासी समुदायों पर पड़ता है। इसकी अंतिम सुनवाई 25 और 26 नवंबर 2026 को तय है, जिस पर मोदी सरकार ने सहमति दी थी।
लेकिन अब एक चौंकाने वाले यू-टर्न में मोदी सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट कलकत्ता हाई कोर्ट की सारी कार्यवाही पर रोक लगा दे। इस याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में संभवतः 5 अक्टूबर 2026 को होगी। उन्होंने कहा कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता के चुनौती देने के अधिकार को बरकरार रखा था। याचिकाकर्ता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय, दोनों में बहुत वरिष्ठ अधिकारी रह चुकी हैं। मोदी सरकार ने उनके इस अधिकार पर सवाल उठाया था, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। अब मोदी सरकार वही दलील सुप्रीम कोर्ट में दे रही है। उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट कलकत्ता हाई कोर्ट को तय कार्यक्रम के मुताबिक सुनवाई जारी रखने देगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुखद सच्चाई यह है कि कलकत्ता हाई कोर्ट में ये पांच याचिकाएं लंबित होने के बावजूद मोदी सरकार बेपरवाही से आगे बढ़ती हुई देश पर यह पारिस्थितिक तबाही थोप रही है।
Updated on:
30 Sept 2026 10:13 am
Published on:
30 Sept 2026 10:13 am
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