
Kannur University Fake Appointment Case: केरल में नकली दस्तावेज बनाकर बिना किसी असल नियुक्ति के एक प्रोफेशनल असिस्टेंट के नाम पर यूनिवर्सिटी से पैसे निकालने का मामला सामने आया है। इस मामले में नकली दस्तावेज बनाकर नियुक्ति दिखाने वाले एक असिस्टेंट प्रोफेसर को केरल की अदालत ने 6 साल और 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। प्रोफेसर पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी कागजात तैयार कर एक प्रोफेशनल असिस्टेंट की नियुक्ति दिखाकर यूनिवर्सिटी के पैसे का गलत इस्तेमाल किया।
कन्नूर विजिलेंस कोर्ट के जज के. रामकृष्णन ने स्वामी आनंदतीर्थ कैंपस, पय्यानूर के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. एन.के. दीपक (54) को अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी पाया। दीपक कन्नूर के चिरक्कल के रहने वाले हैं। कोर्ट ने उन्हें कुल छह साल की जेल और 80 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, साल 2008 में कन्नूर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने स्वामी आनंदतीर्थ कैंपस के फिजिक्स विभाग में रोजाना मजदूरी के आधार पर एक प्रोफेशनल असिस्टेंट की नियुक्ति का आदेश जारी किया था। उस समय फिजिक्स विभाग की जिम्मेदारी दीपक के पास थी और उन्हें प्रोफेशनल असिस्टेंट के चयन की जिम्मेदारी दी गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, दीपक ने कैंपस में काम करने वाले एक अन्य प्रोफेशनल असिस्टेंट के दोस्त के योग्यता प्रमाणपत्र की कॉपी हासिल की। इसके बाद उसमें एक फर्जी पता जोड़कर नया फर्जी योग्यता प्रमाणपत्र तैयार किया गया। इसके बाद दीपक ने यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को यह विश्वास दिलाया कि एक प्रोफेशनल असिस्टेंट की नियुक्ति हो चुकी है। इसके बाद कर्मचारी को वेतन देने के नाम पर यूनिवर्सिटी के फंड से पैसे निकाले गए और उनका गलत इस्तेमाल किया गया।
विजिलेंस की कन्नूर यूनिट ने दीपक के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच पूरी करने के बाद विजिलेंस ने कन्नूर विजिलेंस कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। अभियोजन पक्ष की ओर से विजिलेंस पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अनूप के.बी. अदालत में पेश हुए। मामले की जांच पहले विजिलेंस कन्नूर यूनिट के तत्कालीन डीएसपी वी. मधुसूदनन ने की। इसके बाद वर्तमान यूनिट प्रमुख डीएसपी बाबू पेरिंगेथ ने जांच आगे बढ़ाई।