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Karnataka Form 7 Controversy: Form-7 विवाद ने पकड़ा तूल, BJP प्रतिनिधिमंडल पहुंचा DGP के पास; प्रियंक खरगे ने मांगा जवाब

Form 7 Application: कर्नाटक की सियासत में Form-7 अब नया विवाद बनता जा रहा है। बीजेपी की पुलिस से शिकायत और मंत्री प्रियंक खरगे के तीखे सवालों ने मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ दी है। आखिर सैकड़ों फॉर्म एक साथ तैयार होने के पीछे कौन है?
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Oct 04, 2026
Karnataka Form 7 controversy
Karnataka Form 7 controversy: Form-7 विवाद ने पकड़ा तूल, BJP प्रतिनिधिमंडल पहुंचा DGP के पास; प्रियंक खड़गे ने मांगा जवाब (फोटो सोर्स: ANI)

Karnataka BJP: कर्नाटक में मतदाता सूची से जुड़े Form-7 आवेदनों को लेकर सियासी टकराव अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। बीजेपी के एक शीर्ष प्रतिनिधिमंडल ने डीजी-आईजीपी एम.ए. सलीम से मुलाकात कर पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज और जांचे जा रहे मामलों पर रोक लगाने की मांग की। वहीं मंत्री प्रियंक खरगे ने इस मांग पर सवाल उठाते हुए बड़ी संख्या में पहले से भरे फॉर्म बांटे जाने की प्रक्रिया और उसके पीछे मौजूद लोगों की भूमिका पर जवाब मांगा है।

Karnataka Form 7 Controversy: एक फॉर्म, कई सवाल: कर्नाटक में BJP और सरकार आमने-सामने

कर्नाटक में Form-7 को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का प्रतिनिधिमंडल पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक एम.ए. सलीम से मिला और पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ Form-7 आवेदनों से संबंधित मामलों में पुलिस की कार्रवाई तथा एफआईआर की समीक्षा रोकने की मांग रखी।

बीजेपी का आरोप है कि उसके कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने पुलिस से पूरे मामले में कार्रवाई पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से मंत्री प्रियंक खड़गे ने इस मांग के औचित्य पर ही सवाल खड़े कर दिए।

खरगे के मुताबिक विवाद सिर्फ Form-7 जमा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि बड़ी संख्या में पहले से तैयार आवेदन आखिर तैयार कौन कर रहा है और लोगों तक पहुंचा कौन रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति बूथ लेवल एजेंट (BLA) भी है, तो वह एक साथ 300-400 फॉर्म कैसे उपलब्ध करा सकता है?

मंत्री ने यह भी कहा कि कथित तौर पर इन फॉर्मों में मतदाता का नाम, पता और EPIC नंबर जैसी जानकारी पहले से दर्ज मिल रही है। ऐसे में जानकारी के स्रोत को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आवेदनों में समाज के कुछ खास वर्गों को ही शामिल किए जाने की बात सामने आ रही है।

Representation of the People Act का भी जिक्र

प्रियंक खरगे ने स्पष्ट किया कि सरकार यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस पूरी प्रक्रिया को संचालित करने वाले लोग कौन हैं और उन्हें मतदाताओं से जुड़ी जानकारी कैसे मिल रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कानून के उल्लंघन की बात सामने आती है तो Representation of the People Act, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

Form-7 निर्वाचन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति या आवेदन दाखिल करने में किया जाता है। इसलिए बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन सामने आने पर उनकी सत्यता और स्रोत की जांच चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिहाज से अहम हो जाती है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कर्नाटक में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं। अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई और इस बात पर हैं कि Form-7 आवेदनों की कथित बड़े पैमाने पर तैयारी के पीछे वास्तव में कौन लोग हैं।

Updated on:
04 Oct 2026 11:48 am
Published on:
04 Oct 2026 11:16 am