
Gruha Lakshmi Yojana: कर्नाटक सरकार ने गृह लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को मिलने वाली 2 हजार रुपये की मासिक आर्थिक सहायता को लेकर हाईकोर्ट में अहम दलील दी। गुरुवार को कोर्ट में राज्य सरकार ने कहा कि योजना के लाभार्थी हर महीने मिलने वाली 2 हजार रुपये की राशि पर कानूनी अधिकार का दावा नहीं कर सकते। सरकार के मुताबिक, इस योजना का क्रियान्वयन प्रशासनिक जरूरतों और राज्य की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है।
बता दें कि बेंगलुरु के कुछ श्रमिकों ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने गृह लक्ष्मी योजना की दो किस्तों के करीब 5 हजार करोड़ रुपये के बकाया भुगतान को जारी नहीं किया है। इसके करीब 12.6 करोड़ महिला लाभार्थी प्रभावित हुई है।
इस मामले की जस्टिस अनु शिवरामन और जस्टिस केएस भरत कुमार की पीठ ने सुनवाई की। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता तारानाथ पुजारी पेश हुए। हाईकोर्ट में पीठ के सामने दाखिल अपने जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि किसी कल्याणकारी योजना का अस्तित्व मात्र लाभार्थियों को आर्थिक सहायता पाने का अटूट कानूनी अधिकार नहीं देता। लाभार्थी न्यायिक हस्तक्षेप के जरिए सरकार को हर हाल में भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।
कोर्ट में सरकार ने दलील दी कि गृह लक्ष्मी योजना का उद्देश्य परिवार की महिला मुखिया को आर्थिक सहायता देकर सशक्त बनाना है, लेकिन इसका संचालन प्रशासनिक परिस्थितियों और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार किया जाता है।
सरकार ने यह भी कहा कि जब राज्य वास्तविक वित्तीय संकट के कारण सहायता राशि जारी करने में असमर्थ हो, तब लाभार्थी 'वैध अपेक्षा' (Legitimate Expectation) के सिद्धांत के आधार पर भुगतान की मांग नहीं कर सकते।
सरकार ने अपने जवाब में स्वीकार किया कि वित्तीय कठिनाइयों के कारण फरवरी और मार्च 2025 की गृह लक्ष्मी योजना की सहायता राशि लाभार्थियों के खातों में नहीं भेजी जा सकी।
सरकार के अनुसार, इन दोनों महीनों की राशि जारी करने के प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे गए थे, लेकिन आवश्यक बजट आवंटन जारी नहीं किया गया। इसी वजह से भुगतान अटका हुआ है।
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से याचिका खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि यह मामला न तो कानूनी रूप से और न ही तथ्यों के आधार पर सुनवाई योग्य है।
सरकार का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील को सरकार की आपत्तियों पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।