राष्ट्रीय

कर्नाटक की जेल में VIP सुविधाएं, महिला मित्र से मुलाकात और ‘रेट लिस्ट’ के खुलासे के बाद जेल अधीक्षक का तबादला

Jail VIP Treatment: कर्नाटक की मांड्या जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट और अवैध रेट लिस्ट के खुलासे के बाद जेल अधीक्षक का तबादला कर दिया गया है। जानिए क्या है पूरा मामला...
2 min read
Aug 31, 2026
Prisoner VIP treatment, Jail scandal India
जेल अधीक्षक शांताम्मा (फोटो सोर्स- IANS)

Jail VIP Facilities: कर्नाटक की मांड्या जेल में कैदियों को नियम तोड़कर वीआईपी सुविधाएं देने और बैरक से लेकर मटन-चिकन तक की 'रेट लिस्ट' चलाने के मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। अस्पताल के स्पेशल वार्ड में इलाज के बहाने भर्ती एक कैदी के महिला मित्र के साथ पकड़े जाने और 80 कैदियों के दस्तखत वाला शिकायती पत्र सामने आने के बाद राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है। डीजीपी (जेल) आलोक कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल अधीक्षक शांताम्मा को तत्काल प्रभाव से हटाकर बल्लारी केंद्रीय जेल भेज दिया है।

अस्पताल का स्पेशल वार्ड और महिला मित्र के साथ मिला कैदी

पूरे मामले की शुरुआत कर्नाटक राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के मांड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (MIMS) अस्पताल में किए गए अचानक निरीक्षण से हुई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि मोहम्मद हुसैन नाम का एक कैदी बिना किसी ठोस चिकित्सीय कारण के अस्पताल के स्पेशल वार्ड में भर्ती था। इतना ही नहीं, इलाज के नाम पर स्पेशल वार्ड में मौजूद यह कैदी वहां एक महिला मित्र के साथ आराम से समय बिताते पाया गया। इस घटना ने जेल प्रशासन की मिलीभगत और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।

कमरे से लेकर मटन-चिकन तक की रेट लिस्ट वायरल

अधीक्षक के तबादले के बीच मांड्या जेल से जुड़ा एक और दस्तावेज मीडिया में वायरल हो गया है। लगभग 80 कैदियों के हस्ताक्षर, अंगूठे के निशान और यूटीपी नंबरों वाले इस पत्र में जेल के अंदर चलने वाली कथित 'रेट लिस्ट' का पर्दाफाश किया गया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि कोठरी नंबर 1 के लिए 10,000 रुपये, कोठरी 3 और 4 के लिए 15,000 रुपये तथा अन्य कमरों के लिए 5,000 से 8,000 रुपये प्रतिमाह वसूले जाते थे। इसके अलावा बैरक बदलने का रेट 2,000 रुपये और सजा वाली कोठरी से बाहर आने के लिए 10,000 रुपये तय थे। पैसे देने पर कैदियों को 1,250 रुपये प्रति किलो मटन और 700 रुपये प्रति किलो चिकन जैसी स्पेशल डाइट भी उपलब्ध कराई जाती थी, जबकि यह रकम न देने वाले कैदियों को प्रताड़ित करने और फांसी पर लटकाने तक की धमकियां दी जाती थी।

मामले की जांच में जुटा प्रशासन

मामला सामने आते ही डीजीपी आलोक कुमार ने खुद मांड्या जेल का दौरा कर कैदियों से पूछताछ की। हालांकि, शुरुआती जांच में पुलिस प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि कही कैंटीन की बुनियादी सुविधाओं के नाम पर तो कैदियों से कागजात पर अंगूठे नहीं लगवाए गए थे। वहीं, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने वायरल पत्र को अनधिकृत पर्ची करार देते हुए कहा कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। सरकार इस बात का भी पता लगा रही है कि जेल के अंदर मोबाइल फोन कैसे पहुंचा और यह दस्तावेज बाहर कैसे लीक हुआ।

Updated on:
31 Aug 2026 01:54 pm
Published on:
31 Aug 2026 01:52 pm