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महिलाओं को लेकर केरल के मौलवी का विवादित बयान, बोले- बाहर निकलने से हो सकता है बड़ा विनाश

Kerala Grand Mufti: केरल के मुस्लिम धर्मगुरु शेख अबूबकर अहमद का महिलाओं को लेकर दिया गया एक बयान विवादों में आ गया है। उन्होंने महिलाओं को घर में ही रहने की सलाह दी है। जानिए क्या है पूरा मामला...
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कोच्चि

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Pratiksha Gupta

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Updated: 31 Aug 2026, 12:00 PM IST

Kerala Grand Mufti Statement, Sheikh Abubakr Ahmad

महिलाओं को लेकर केरल के मौलवी का विवादित बयान

Sheikh Abubakr Ahmad: केरल के ग्रैंड मुफ्ती और प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु शेख अबूबकर अहमद के एक नए बयान ने नई बहस और विवाद पैदा कर दिया है। कोच्चि में आयोजित 'हब्बुल रसूल' सम्मेलन के दौरान उन्होंने महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में आने पर रोक लगाने और उन्हें घर की सीमाओं में रहने की सलाह दी। धर्मगुरु ने दावा किया कि महिलाओं का सार्वजनिक जीवन में प्रवेश 'बड़े विनाश' का कारण बन सकता है।

सोने के आभूषण से की महिलाओं की तुलना

ऑल-इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलेमा के महासचिव कांथापुरम ने अपने संबोधन में महिलाओं की तुलना सोने के आभूषणों से की। उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि जिस तरह सोने के हार की खूबसूरती और उसकी कीमत बनाए रखने के लिए उसे सुरक्षित डिब्बे में बंद रखा जाता है, उसी तरह महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए उनका घर के अंदर रहना जरूरी है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सोने को सड़क किनारे छोड़ दिया जाए, तो हर कोई उसे छुएगा और उसकी चमक खत्म हो जाएगी, जबकि सिल-बट्टे जैसी आम चीजों को खुले में रखा जा सकता है। मौलवी ने तर्क दिया कि इस्लाम में पर्दा प्रथा का मकसद महिलाओं का अपमान करना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और गरिमा को बनाए रखना है।

'कुरान के सिद्धांतों और परंपरा का दिया हवाला'

कांथापुरम ने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि पवित्र कुरान महिलाओं को घर के अंदर रहने का निर्देश देता है। उन्होंने कहा कि समस्त केरल जमीयतुल उलेमा पिछले 100 वर्षों से इस विचार को सिखाता आ रहा है, जिससे महिलाओं की गरिमा को बनाए रखने में मदद मिली है।
अपने बयान का बचाव करते हुए धर्मगुरु ने यह भी कहा कि इस्लाम ने ऐतिहासिक रूप से महिलाओं को बड़ा स्थान दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि इस्लाम ने अरब की प्राचीन कुप्रथाओं जैसे कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाई और महिलाओं को संपत्ति व विरासत में अधिकार दिए। उनके अनुसार, महिलाओं के बाहर निकलने पर पाबंदी भी इसी सम्मान का एक हिस्सा है।

'कोई हमें बोलने से नहीं रोक सकता'

बयान पर सवाल उठाने वाले संगठनों को जवाब देते हुए मौलवी ने कहा कि धार्मिक विद्वानों को अपने समुदाय को जागरूक करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि हमने धर्म का गहन अध्ययन किया है, इसलिए अपनी बात कहना हमारा कर्तव्य है। हम अपने समुदाय से बात करते रहेंगे और कोई हमें रोक नहीं सकता। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे अन्य धर्मों के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते, इसलिए उनके धार्मिक मामलों में भी किसी को दखल नहीं देना चाहिए।