
KEA Police Recruitment 2026: कर्नाटक में 2 अगस्त को आयोजित हुई 'सिविल पुलिस कांस्टेबल' भर्ती परीक्षा अचानक विवादों में घिर गई। विजयपुरा जिले के टिकोटा स्थित 'शारदम्बा पीयू कॉलेज' परीक्षा केंद्र पर उस समय भारी हंगामा मच गया, जब कई अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उनकी ओएमआर (OMR) उत्तर पुस्तिका का नंबर और प्रश्नपत्र (Question Paper) का नंबर आपस में मेल नहीं खा रहा है।
सोशल मीडिया पर फैली एक झूठी खबर के बहकावे में आकर कुछ उम्मीदवारों ने हंगामा खड़ा कर दिया और परीक्षा का बहिष्कार करते हुए सेंटर से बाहर निकल गए। राज्य भर के 1,453 पुरुष और महिला पुलिस कांस्टेबल पदों के लिए आयोजित इस परीक्षा में देखते ही देखते तनाव का माहौल बन गया।
मामले को तूल पकड़ता देख कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) के कार्यकारी निदेशक ने तुरंत मोर्चा संभाला और स्थिति स्पष्ट की। KEA ने बयान जारी कर बताया:
कोई बाध्यता नहीं: आधिकारिक अधिसूचना (Official Notification), निर्देश पुस्तिका या मौखिक निर्देशों में कहीं भी यह नहीं कहा गया था कि ओएमआर और प्रश्नपत्र का नंबर एक समान होना चाहिए।
कोड भरने का प्रावधान: OMR शीट में केवल 'क्वेश्चन पेपर सीरीज कोड' (Series Code) और 'वर्जन कोड' (Version Code) भरने का स्थान होता है, न कि प्रश्नपत्र संख्या मिलाने का।
अफवाहों पर ध्यान न दें: प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरें पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक हैं।
KEA का संदेश: "सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाने वालों से सतर्क रहें। परीक्षा पूरी पारदर्शिता और तय नियमों के तहत ही कराई गई है।"
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़ी भर्ती परीक्षा में सोशल मीडिया की अफवाहों ने छात्रों का नुकसान किया हो।
| पहलू | मुख्य जानकारी |
| कुल पद | 1,453 (पुरुष एवं महिला सिविल पुलिस कांस्टेबल) |
| परीक्षा की तारीख | 2 अगस्त 2026 |
| आयोजक संस्था | कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (KEA) |
| मुख्य कारण | OMR और प्रश्नपत्र नंबर अलग होने पर सोशल मीडिया का भ्रामक प्रचार |
OMR और प्रश्नपत्र नंबर अलग होने पर सोशल मीडिया का भ्रामक प्रचार
छात्र ध्यान रखें: OMR शीट भरते समय बरतें ये सावधानियां
इंस्ट्रक्शन बुकलेट ध्यान से पढ़ें: परीक्षा हॉल में मिलने वाले निर्देशों को सोशल मीडिया के ज्ञान से ऊपर रखें।
सीरीज और वर्जन कोड: मूल्यांकन (Evaluation) हमेशा आपके प्रश्नपत्र के Series/Version Code के आधार पर होता है, न कि उसके रैंडम सीरियल नंबर से।
अफवाहों से बचें: परीक्षा केंद्र पर तैनात वीक्षक (Invigilator) की बात पर ही भरोसा करें। किसी भी भ्रम की स्थिति में केंद्र व्यवस्थापक से संपर्क करें।
परीक्षा छोड़ चुके छात्रों के लिए अब अवसर हाथ से निकलता दिख रहा है, क्योंकि प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि नियम में कोई त्रुटि नहीं थी। यह घटना सभी प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए एक बड़ा सबक है कि सोशल मीडिया के अनधिकृत दावों पर आंख मूंदकर भरोसा करना कितना भारी पड़ सकता है।