
US पढ़ाई विवाद पर अभिजीत दीपके का पलटवार | फोटो सोर्स- ANI
Abhijeet Dipke Education: NEET पेपर लीक आंदोलन से चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) इन दिनों विवादों में है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की अमेरिका में हुई पढ़ाई और पार्टी को मिलने वाले पैसों (Funding) पर सवाल उठाए जा रहे हैं। एक RTI एक्टिविस्ट द्वारा दीपके के परिवार की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की थी। अब अभिजीत डिपके ने खुद सामने आकर इन आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि अमेरिका में उनकी पढ़ाई किसी अघोषित संपत्ति से नहीं, बल्कि स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन के दम पर हुई है।
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने विरोधियों को जवाब दिया। उन्होंने उन सभी बातों को गलत बताया जिसमें कहा जा रहा था कि उनके परिवार ने छिपे हुए पैसों से उन्हें विदेश भेजा। बातचीत के दौरान दीपके ने अपनी यूनिवर्सिटी का लेटर भी दिखाया। उन्होंने कहा कि मेरी पढ़ाई का पूरा खर्च बोस्टन यूनिवर्सिटी से मिली स्कॉलरशिप से हुआ था। इसके अलावा जो पैसे कम पड़ रहे थे, उसके लिए मैंने एजुकेशन लोन लिया था। उस लोन को मैं आज भी चुका रहा हूं।
देशभर में हुए NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों को याद करते हुए दीपके ने कहा कि इस आंदोलन को किसी बड़े कॉर्पोरेट ने नहीं, बल्कि आम जनता ने संभाला था। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रदर्शन में शामिल थे, वे जानते हैं कि हमें आम लोगों से कितना समर्थन मिला। लोग खुद हमारे लिए खाना दान कर रहे थे और अपनी पानी की बोतलें साथ लेकर आ रहे थे।
इतना ही नहीं, डिपके ने यह भी बताया कि कि ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस के कुछ जवानों ने भी नाम न छापने की शर्त पर उनका साथ दिया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मियों ने हमसे कहा था कि वे हमें पानी की बोतलें मुहैया कराएंगे, बशर्ते हम उनकी पहचान गुप्त रखें, क्योंकि उनके अपने बच्चे भी NEET की तैयारी कर रहे थे और वे इस मुद्दे से जुड़ाव महसूस कर रहे थे।
जब इंटरव्यू में दीपके से पूछा गया कि उनकी पार्टी CJP आगे कैसे काम करेगी और पैसा कहां से लाएगी। तो उन्होंने कहा कि सब कुछ बिल्कुल साफ-सुथरा रहेगा। उन्होंने बताया कि आगे चलकर CJP जनता के बीच जाएगी और क्राउडफंडिंग (जनता से चंदा) के जरिए पैसे जुटाएगी। हम लोगों से मदद मांगेंगे और पूरा हिसाब-किताब सबके सामने रखेंगे।
CJP की फंडिंग को लेकर सवाल तब और गहरे हो गए जब वरिष्ठ वकील और सांसद कपिल सिब्बल ने NEET आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुए छात्रों की मदद के लिए 1 करोड़ रुपये के कानूनी सहायता कोष की घोषणा की। इसके बाद शिकायतकर्ता ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है और इस मदद की जांच की मांग की है।
इस पूरे मामले पर CJP की मुख्य प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने RTI एक्टिविस्ट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए इसे एक निजी व्यक्ति को निशाना बनाने की साजिश करार दिया। वैष्णवी गौर ने लिखा कि जो लोग किसी व्यक्ति की निजी पढ़ाई के खर्च को लेकर इतनी उत्सुकता दिखा रहे हैं और RTI दाखिल कर रहे हैं, उन्हें एक बार PM CARES Fund की तरफ भी नजर डालनी चाहिए। मोदी जी आपको माफ कर देंगे, चिंता मत कीजिए।
इस पूरे विवाद की शुरुआत 1 अगस्त को हुई, जब सूरत के रहने वाले एक RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने महाराष्ट्र सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों के पास एक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में उन्होंने अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके की कमाई की जांच करने की मांग की थी।
भगवानराव दीपके महाराष्ट्र सरकार के MIDC विभाग में एक जूनियर इंजीनियर थे और अब रिटायर हो चुके हैं। एक्टिविस्ट अमित तिवारी का सवाल था कि जिस सरकारी कर्मचारी की सैलरी महीने में सिर्फ 60,000 से 65,000 रुपये रही हो, वह अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए अमेरिका जैसे महंगे देश कैसे भेज सकता है।
Updated on:
03 Aug 2026 09:22 am
Published on:
03 Aug 2026 08:55 am
