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PM Modi Abuse Case: “बेटी ने माफी मांगी, फिर भी नहीं मिली राहत… अब मां ने सुरक्षा की गुहार लगाई, आखिर पूरा मामला क्या है?

Jantar Mantar Protest : जंतर-मंतर पर भड़काऊ माहौल के फेर में आकर प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाली किशोरी अब अपने किए पर शर्मिंदा है। हाथ जोड़कर देश से क्षमा याचना के बाद भी जब कानूनी चाबुक नहीं थमा और धमकियों का दौर शुरू हुआ, तो बेबस परिवार को छिपने के लिए जगह बदलनी पड़ रही है।
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PM Modi Abuse Case

PM Modi Abuse Case :माफी के बावजूद FIR वापस नहीं, लड़की की मां ने मांगी सुरक्षा (फोटो सोर्स: @ians_india)

FIR Against Minor Girl, Jantar Mantar Protest : विरोध प्रदर्शन का जोश, हाथ में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का असर यह एक ऐसा घातक कॉकटेल बन चुका है जो किसी भी बहके हुए युवा का भविष्य पल भर में दांव पर लगा सकता है। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बेहद अमर्यादित और भड़काऊ टिप्पणी करने वाली 15 वर्षीय नाबालिग किशोरी के मामले में अब उसकी मां का दर्द छलक पड़ा है। पूरे देश से हाथ जोड़कर माफी मांगने और बेटी के नाबालिग होने का हवाला देने के बावजूद पुलिसिया कार्रवाई का शिकंजा ढीला नहीं हुआ है, जिससे परिवार खौफ के साये में जीने को मजबूर है।

"गलती मान ली, तो क्यों नहीं वापस हो रही FIR?"

किशोरी की मां ने दर्द बयां करते हुए सवाल उठाया कि जब बेटी को अपनी गलती का अहसास हो चुका है और उसकी आंखों में शर्मिंदगी है, तब भी मुकदमा क्यों रद्द नहीं किया जा रहा? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी खुद ऐसे भटके हुए बच्चों को माफ कर सही राह दिखाने की बात करते हैं। ऐसे में पुलिस को इस मामले को बंद कर देना चाहिए।

परिवार का दावा है कि वीडियो वायरल होने के बाद से उन्हें लगातार अनजान गाड़ियों और संदिग्ध लोगों की आवाजाही के कारण अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है। चेहरा ढककर बाहर निकलने और भोजन तक के लाले पड़ने जैसी स्थिति के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं और सिर्फ अपने परिवार की सुरक्षा चाहते हैं।

जंतर-मंतर की उस दोपहर क्या हुआ था?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, किशोरी 23 जुलाई को अपने जन्मदिन की खरीदारी का बहाना बनाकर घर से निकली थी। जंतर-मंतर पर जारी एक प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद भीड़ और भड़काऊ माहौल के असर में आकर उसने पीएम मोदी के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। जब रिश्तेदारों ने वायरल वीडियो भेजा, तब परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

इसके बाद किशोरी ने भी एक वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर देशवासियों से क्षमा मांगी थी। उसने माना कि वह 12 से 18 साल की उस संवेदनशील उम्र में है जहां इंस्टाग्राम और फेसबुक के इस दौर में बच्चे माहौल के आवेग में बिना सोचे-समझे बहक जाते हैं।

कानूनी स्थिति: क्या कहता है नया कानून और 'जीरो FIR'?

इस पूरे प्रकरण में कानूनी पहलू भी काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं:

नोएडा में दर्ज हुई जीरो FIR: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर स्थित एक्सप्रेसवे थाना क्षेत्र में 29 जुलाई को गाजियाबाद निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर 'जीरो एफआईआर' दर्ज की गई थी।

भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं: यह केस नए कानूनों के तहत धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना), धारा 353(1) (जनता में उपद्रव फैलाने वाले बयान) और धारा 356(1) (मानहानि) के तहत पंजीकृत किया गया है।

दिल्ली पुलिस का रुख: वहीं दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उनकी तरफ से इस घटना को लेकर कोई नई या अलग एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

बाल अधिकार, कानून और सोशल मीडिया

कानूनी और सामाजिक पहलू : जीरो FIR की व्यवस्था: कानूनन 'Zero FIR' किसी भी क्षेत्राधिकार से परे किसी भी थाने में दर्ज कराई जा सकती है, जिसे बाद में संबंधित घटना वाले थाने को जांच के लिए स्थानांतरित कर दिया जाता है।

बाल न्याय अधिनियम (JJ Act) का दायरा: आरोपी एक 15 वर्षीय नाबालिग है, इसलिए उस पर वयस्क अपराधियों जैसी प्रक्रिया लागू नहीं होती। बाल न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम के तहत ऐसी परिस्थितियों में दंडात्मक रवैये के बजाय सुधारात्मक दृष्टिकोण (Reformative Approach) को प्राथमिकता दी जाती है। पहचान गुप्त रखना और परामर्श देना इसका प्रमुख हिस्सा है।

डिजिटल युग की चुनौतियां: मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि सोशल मीडिया रील्स, व्यूज की होड़ और विरोध प्रदर्शनों में होने वाली नारों की उग्रता अक्सर 12 से 18 वर्ष के किशोरों के निर्णय लेने की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मर्यादा की सीमा रेखा का ज्ञान आज की युवा पीढ़ी के लिए बेहद जरूरी हो गया है।