कर्नाटक में हाई वोल्टेज सियासत! मनरेगा का नाम बदलने के खिलाफ बेंगलुरु में कांग्रेस का 'लोकभवन चलो' मार्च। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और डीके शिवकुमार को पुलिस ने ऐहतियातन हिरासत में लिया। जानें केंद्र के फैसले पर क्यों भड़के सीएम और क्या है ग्राम पंचायतों को लेकर उनकी बड़ी घोषणा। पूरा मामला यहां पढ़ें।
केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा का नाम बदल कर वीबी जीरामजी करने के खिलाफ व नई योजना को रद्द करने की मांग को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को बेंगलुरु में विरोध मार्च निकाला और राज्यपाल थावर चंद गहलोत को ज्ञापन सौंपा। दिलचस्प बात यह रही कि 'लोकभवन चलो' मार्च में खुद मुख्यमंत्री एन.सिद्धरामय्या, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार, प्रभारी महासचिव रणदीप सुरजेवाला भी शामिल हुए।
प्रदर्शनकारी लोकभवन की ओर जाने लगे तो पुलिस ने सीएम, डिप्टी सीएम सभी को ऐहतियातन हिरासत में ले लिया। सीएम और डिप्टी सीएम बाकायदा पुलिस की गाड़ी में बैठे दिखे। बाद में सभी को लोकभवन ले जाकर छोड़ दिया गया जहां नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। इससे पहले हुई विरोध सभा में मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने राज्य के सभी ग्राम पंचायत कार्यालयों का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखने की घोषणा की है। सभा में सिद्धरामय्या ने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला महात्मा गांधी के आदर्शों तथा विकेंद्रीकरण की भावना के प्रति नफरत को दर्शाता है।
विरोध सभा में सीएम सिद्धरामय्या मंच पर बोलने के लिए खड़े हुए तो डिप्टी सीएम समर्थक कार्यकर्ताओं ने डीके-डीके नारे लगाए। इस पर सीएम भड़क गए। उन्होंने नाराजगी जताई तो नारे और तेज हो गए। इस पर उन्होंने हाथ से इशारा कर कार्यकताओं को चुप कराया।