
कश्मीर घाटी (Kashmir Valley) में काम करने वाले कश्मीरी पंडित (Kashmiri Pandit) वर्कर्स को अपना रवैया बदलने की आतंकी धमकी वाले एक ऑनलाइन पोस्ट के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने ऐसे वर्कर्स को 25 अगस्त तक छुट्टी पर रहने या वर्क फ्रॉम होम के निर्देश दिए हैं। शिक्षा एवं राजस्व विभाग के कर्मचारियों को खास तौर पर सुरक्षित स्थान पर और सतर्क रहने को कहा गया है।
पिछले दिनों दो प्रवासी श्रमिकों की हत्या के बाद यह ऑनलाइन धमकी पत्र मिला था जो पाकिस्तान (Pakistan) के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के प्रॉक्सी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (United Liberation Council) की ओर से जारी किया गया था। जानकार सूत्रों ने बताया कि प्रशासन ने कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं किया है लेकिन विभागाध्यक्षों को मौखिक निर्देश देकर कश्मीरी पंडित वर्कर्स के लिए वर्क फ्रॉम होम या छुट्टी की व्यवस्था लागू की गई है। कश्मीरी पंडित वर्कर्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) पर ड्यूटी से भी मुक्त कर दिया गया है।
कश्मीरी पंडितों के संगठन पनुन कश्मीर के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि 7 अगस्त को ऑनलाइन जारी किए गए धमकी भरे पत्र में कुछ वर्कर्स के नाम, फोन नम्बर, कार्यस्थल और परिवार जैसी सही जानकारियों का ज़िक्र है। इस वजह से खतरे की आशंका बढ़ गई है। संगठन ने कश्मीरी पंडित वर्कर्स के प्राइवेट डेटा लीक होने को गंभीर बात बताया है और इस मामले पर चिंता प्रकट की है।
सरकार ने जुलाई के अंतिम सप्ताह से ही विशेष सुरक्षा अभियान के तहत 3,000 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है लेकिन ऑनलाइन जारी किए गए धमकी भरे पत्र के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय में डर का माहौल है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए साल 2010 में शुरू किए गए 'प्रधानमंत्री स्पेशल रोजगार पैकेज' के तहत करीब 6,000 कश्मीरी पंडितों को कश्मीर घाटी में सरकारी नौकरी दी गई थी। उसके बाद से इन वर्कर्स का परोक्ष विरोध होता रहा है। 5 वर्कर्स की हत्या भी हो चुकी है।