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Bihar Politics: प्रशांत किशोर को छोड़ बीजेपी में क्यों शामिल हुए मशहूर गणितज्ञ केसी सिन्हा? खुद बता दिया कारण

Professor KC Sinha: देश के प्रसिद्ध गणितज्ञ प्रो. केसी सिन्हा ने जन सुराज पार्टी छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ले ली है। पटना में उन्होंने राष्ट्रहित को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि 'करंट के साथ चलना चाहिए।'
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Jul 15, 2026
Bihar Politics
मशहूर गणितज्ञ केसी सिन्हा भाजपा में शामिल(फोटो-IANS)

KC Sinha Joins BJP: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। देश के चर्चित गणितज्ञ और मैथ की कई लोकप्रिय पुस्तकों के लेखक प्रोफेसर कृष्ण चंद्र सिन्हा (केसी सिन्हा) ने प्रशांत किशोर के जन सुराज पार्टी का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रहित सबसे ऊपर है और करंट के विरुद्ध चलेंगे तो बहुत समय लगेगा, करंट के साथ चलिएगा तो जल्दी काम होता है।

भाजपा कार्यालय में ली सदस्यता

बुधवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में प्रो. केसी सिन्हा ने बीजेपी की सदस्यता ली। इस दौरान जन सुराज पार्टी से चुनाव लड़ चुके बिट्टू सिंह और गोपाल सिंह भी भाजपा में शामिल हुए।
प्रो. केसी सिन्हा जन सुराज पार्टी के शुरुआती नेताओं में गिने जाते रहे हैं। 2025 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्होंने जन सुराज के टिकट पर कुम्हरार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। हालांकि उनको हर का सामना करना पड़ा था।

बीजेपी में जाने का बताया कारण

बीजेपी में शामिल होने के बाद प्रो. सिन्हा ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका फैसला राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर लिया गया है। प्रो. केसी सिन्हा ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया युद्ध जैसे हालात की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। ऐसे समय में केंद्र सरकार को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत हो सके। देश को मजबूत करने के लिए और राष्ट्रहित में काम करने के लिए वो भाजपा में शामिल हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत एक समय शिक्षा का वैश्विक केंद्र था और फिर से उसे उसी स्थान पर पहुंचाना होगा। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि जब आवागमन की सुविधाएं सीमित थीं, तब भी विदेशों से हजारों छात्र यहां पढ़ने आते थे। उनके मुताबिक, भारत पहले भी शिक्षा के क्षेत्र में विश्वगुरु रहा है और दोबारा उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

Updated on:
15 Jul 2026 04:33 pm
Published on:
15 Jul 2026 04:32 pm
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