Kerala Election: केरल में कांग्रेस के संभावित सत्ता में आने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। IUML द्वारा सतिशन के समर्थन और अन्य दावेदारों की मौजूदगी से राजनीतिक समीकरण जटिल हो गए हैं।
Kerala Election: केरल में विधानसभा चुनाव पूरे होने के बाद से ही सीएम फेस को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस के भीतर भी अंदरूनी प्रतिस्पर्धा बढ़ने लगी है। राज्य में अगर कांग्रेस की सरकार बनती है तो पार्टी के कई दिग्गज नेता सीएम पद के दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) द्वारा वी डी सतिशन के समर्थन ने भी राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है, जिससे सीएम फेस को लेकर सस्पेंस और गहरा गया है।
IUML के राज्य अध्यक्ष सादिक अली शिहाब थंगल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सर्वे में सतिशन को सबसे आगे दिखाया जाना जनता की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लोगों ने शायद इसी तरह अपनी राय व्यक्त की है, यही मेरी भावना है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद पर अंतिम निर्णय कांग्रेस हाईकमान को लेना है, लेकिन यह निर्णय जनता की राय को ध्यान में रखकर होना चाहिए। IUML ने यह भी संकेत दिया कि सरकार बनने की स्थिति में उसे कैबिनेट में उचित भागीदारी की उम्मीद है।
कांग्रेस के भीतर वी डी सतिशन, रमेश चेन्निथला और के सी वेणुगोपाल प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, तीनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने नेता को सीएम बनाने को लेकर आश्वस्त हैं। सतिशन को जनता के बीच मजबूत नेता माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने पिछले पांच वर्षों में विपक्ष का नेतृत्व करते हुए सरकार के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं, वेणुगोपाल को हाईकमान का करीबी माना जाता है और कई उम्मीदवार उनके समर्थक बताए जाते हैं। चेन्निथला वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर मजबूत दावेदार बने हुए हैं।
यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) में IUML दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, ऐसे में यदि इन चुनावों में गठबंधन को मामूली बहुमत मिलता है तो उसका प्रभाव निर्णायक हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि वह IUML के प्रभाव में निर्णय लेती है। इस बीच एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेशन ने IUML की आलोचना करते हुए कहा कि अगर UDF सत्ता में आती है तो राज्य पर IUML का नियंत्रण होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि IUML पहले से ही मंत्रालयों के बंटवारे को प्रभावित कर रही है, जिससे भविष्य में अस्थिरता पैदा हो सकती है।