
Kerala Chief Minister Pinarayi Vijayan (Photo- IANS)
Kerala Election Exit Poll: केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आएंगे, लेकिन इससे पहले आए एग्जिट पोल नतीजों ने राज्य में सत्ता परिवर्तन के संकेत दे दिए हैं। 9 अप्रैल को भारी वोटिंग के बाद एग्जिट पोल के नतीजों से राज्य में राजनीतिक सरगर्मी शुरू हो गई है। वैसे तो केरल में हर पांच साल बाद सत्ता बदलने का रिवाज था, लेकिन पिछली बार लेफ्ट गठबंधन (LDF) ने इन रुझानों को तोड़ दिया था। ऐसे में एग्जिट पोल का अनुमान और कैसे पिनाराई विजयन सरकार की हैट्रिक लगाने का सपना टूटता नजर आ रहा है, उस पर डालते हैं एक नजरः
एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल में कांग्रेस गठबंधन वाले UDF के सरकार बनने के आसार दिख रहे हैं। केरल की 140 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 71 सीटों की जरूरत है। एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल में कांग्रेस गठबंधन वाले UDF को जहां 78-90 सीटें मिलने का अनुमान है, वहीं लेफ्ट गठबंधन (UDF) 49-62 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।
अगर पार्टी के वोट शेयर पर नजर डालें तो एक्सिस माय इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक राज्य में UDF को 44%, LDF को 39% और NDA को 14 प्रतिशत वोट पाने का अनुमान है।
वहीं News18 VoteVibe Tacker के एग्जिट पोल पर भी गौर करें तो UDF को जहां 70 से 80 सीटें मिलने का अनुमान है, वहीं सत्तारूढ़ LDF 58 से 68 सीटों पर सिमटती हुई नजर आ रही है। भाजपा वाले गठबंधन NDA को कोई खास फायदा होता नहीं दिख रहा है, क्योंकि उसके 0-4 सीट मिलने का अनुमान है।
अगर पार्टी के वोट शेयर पर नजर डालें UDF को करीब 42.6 प्रतिशत वोट, LDF को 39.5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। यानी दोनों पार्टियों के बीच हार-जीत का फैसला बहुत कम अंतर से होने वाला है। भाजपा को 14.3 प्रतिशत वोट मिलता दिखाई दे रहा है, लेकिन यह सीटों में बदलता नहीं दिख रहा।
केरल के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो यहां सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है। LDF और UDF बारी-बारी से इस चक्र को पूरा करते रहे हैं, लेकिन 2021 में पिनाराई विजयन ने इस परंपरा को तोड़ दिया। LDF ने 140 में से 99 सीटे जीतकर राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया। यह तब जब 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों में कड़ी टक्कर की उम्मीद जताई जा रही थी।
केरल के चुनावी समीकरणों में धार्मिक और सामाजिक आधार पर किए गए सर्वे के मुताबिक, मुस्लिम समुदाय का 54.2% और ईसाई समुदाय का 58.3% वोट UDF के खाते में जाता दिख रहा है। इसे ही UDF की संभावित जीत का मुख्य वजह बताई जा रही है। वहीं, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग का बड़ा हिस्सा लेफ्ट गठबंधन के साथ खड़ा नजर आया। हिंदू वोटों पर तीन तरफ बिखराव के बावजूद भाजपा ने करीब 30 प्रतिशत हिस्से पर सेंधमारी करने में सफल रही।
Published on:
29 Apr 2026 08:22 pm
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