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महिलाओं ने बदला गेम? बंगाल का सर्वे करने में कहां आई दिक्कत? EXIT POLL जारी करने वाले ने खुलकर बताया

Exit Poll 2026: महिलाओं का वोट इस बार चुनाव का सबसे बड़ा गेम चेंजर बन सकता है। एक्सिस माई इंडिया के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में बंगाल के डर के माहौल, केरल-असम-तमिलनाडु के समीकरण और महिला मतदाताओं की भूमिका पर खुलकर बात की।

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भारत

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Mukul Kumar

Apr 29, 2026

बंगाल में एग्जिट पोल। (फोटो- AI)

एग्जिट पोल की चर्चा गर्म है और चार राज्यों व एक केंद्रशासित प्रदेश के नतीजों पर सबकी नजर टिकी हुई है। एक्सिस माई इंडिया के चेयरमैन प्रदीप गुप्ता ने आईएएनएस को दिए खास इंटरव्यू में कहा कि इस बार महिलाएं पूरे चुनाव को पलट सकती हैं।

पिछले सालों में कई राज्य सरकारों ने महिलाओं के बैंक खाते में सीधे पैसे देने वाली योजनाएं चलाई हैं। अब सवाल यह है कि महिलाएं इन योजनाओं से कितनी खुश हैं और क्या वे मौजूदा सत्ता पर फिर भरोसा जताएंगी। गुप्ता के मुताबिक, महिला मतदाताओं की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है।

बंगाल में लोग मुंह खोलने से कतराते हैं

प्रदीप गुप्ता ने सबसे ज्यादा चिंता पश्चिम बंगाल को लेकर जताई। उन्होंने बताया कि बंगाल में सर्वे करना इस बार बहुत मुश्किल हो गया। पहले चरण के दौरान उनकी टीम को पता चला कि 60 से 70 प्रतिशत लोग अपनी राय बताने को तैयार ही नहीं थे।

उन्होंने कहा- बंगाल में एक तरह का भय का माहौल है। लोग डरते हैं। एसआईआर (वोटर लिस्ट रिवीजन) को लेकर भी चिंता है। कई लोग सोचते हैं कि अगर उन्होंने किसी पार्टी का नाम ले लिया तो उनका नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है।

देश के बाकी हिस्सों में सिर्फ 10-20 प्रतिशत लोग अपनी पसंद छुपाते हैं, लेकिन बंगाल में यह आंकड़ा बहुत ऊंचा है। गर्मी के साथ-साथ यह डर भी सर्वे करने वालों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

सत्ता विरोधी और सत्ता समर्थक लहर दोनों सक्रिय

हर चुनाव की तरह इस बार भी एंटी-इनकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर और प्रो-इनकंबेंसी यानी सत्ता समर्थक लहर दोनों काम कर रही हैं। गुप्ता ने कहा कि इन दोनों के बीच का संतुलन नतीजों को तय करेगा।

बेरोजगारी और महंगाई जैसे रोजमर्रा के मुद्दे भी वोटरों के मन में हैं। इसके अलावा ये सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश गैर-हिंदी भाषी क्षेत्र हैं, जिससे चुनावी समीकरण और दिलचस्प हो गए हैं।

अलग-अलग राज्यों की अलग कहानी

केरल- यहां वामपंथी सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में है। लेकिन राज्य में हर पांच साल में सरकार बदलने का पुराना ट्रेंड है। ऐसे में एंटी-इनकंबेंसी एक बड़ा फैक्टर बन सकता है।

असम- हिमंता बिस्वा सरमा की भाजपा सरकार दो बार से सत्ता में है। गठबंधनों में काफी बदलाव हुए हैं। अब देखना होगा कि जनता उन्हें तीसरा मौका देती है या नहीं।

तमिलनाडु- डीएमके की सरकार है। लेकिन अभिनेता-राजनेता विजय की नई पार्टी ने मुकाबला और रोचक बना दिया है। कांग्रेस यहां गठबंधन का हिस्सा है।

पुडुचेरी- छोटा राज्य होने के बावजूद यहां भी सत्ता बदलने का ट्रेंड रहा है। मुकाबला कड़ा रहने की उम्मीद है।पश्चिम बंगाल: लेफ्ट और कांग्रेस अलग-अलग लड़ रहे हैं। इससे वोट बंट सकता है और इसका फायदा भाजपा को मिलने की संभावना है।

सर्वे में सटीकता के लिए कड़ी मेहनत

प्रदीप गुप्ता ने बताया कि उनकी टीम हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 200 लोगों से बात करने की कोशिश करती है। अब तक एक्सिस माई इंडिया ने 81 चुनावों में अनुमान लगाए और उनमें से 74 सही साबित हुए।

फिर भी बंगाल जैसे राज्यों में लोगों की चुप्पी को देखते हुए सटीक अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण है। अब सबकी निगाहें 4 मई के नतीजों पर हैं। उस दिन साफ हो जाएगा कि जनता ने किस पर भरोसा किया और महिलाओं का वोट आखिरकार किस तरफ झुका।