राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस चुनाव में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे मतदाताओं के बीच प्रमुख रहे। भाजपा ने इन मुद्दों को जोर-शोर से उठाया, जिसका असर वोटिंग पैटर्न में देखने को मिल सकता है। दूसरी ओर, टीएमसी ने अपने विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं के दम पर जनता को साधने की कोशिश की।