
Kerala News: केरल की हाई कोर्ट (Kerala High Court) ने मंगलवार को तिरुवनंतपुरम से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पार्षद आर. सुगुथन की हिरासत को रद्द कर दिया है। उन्हें 'केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट' (KAAPA), 2007 के तहत हिरासत में लिया गया था। जस्टिस अनिल के नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्णा एस की पीठ ने सुगुथन की पत्नी अश्वथी जीआर की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिका में सुगुथन के खिलाफ 8 जून को जारी हिरासत आदेश को चुनौती दी गई थी।
सुगुथन तिरुवनंतपुरम नगर निगम के वार्ड नंबर 20 से बीजेपी पार्षद हैं। तिरुवनंतपुरम के जिला मजिस्ट्रेट ने एक आदेश जारी कर उन्हें प्रिवेंटिव डिटेंशन में भेजने का निर्देश दिया था। इसके बाद 9 जून को उन्हें हिरासत में लेकर विय्यूर सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। बाद में राज्य सरकार ने KAAPA एडवाइजरी बोर्ड की राय के आधार पर 6 जुलाई को एक आदेश जारी कर उनकी हिरासत की पुष्टि की थी।
कोर्ट के इस फैसले के बाद उनकी पत्नी ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए हिरासत को गैरकानूनी बताया और आरोप लगाया कि सुगुथन को हिरासत के कारणों की सही तरीके से जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के आधार बनाए गए दस्तावेजों के कई पन्ने या तो गायब थे या पढ़ने लायक नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी ने सुगुथन के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों पर विचार नहीं किया था।
आर. सुगुथन को KAAPA कानून के तहत जून 2026 में जेल में डाल दिया गया था। यह किसी एक घटना की वजह से नहीं था, बल्कि उनके खिलाफ कई पुराने और नए आपराधिक केस के आधार पर ऐसा किया गया था। पुलिस के अनुसार 2019 से 2026 के बीच वट्टियोरकावू पुलिस स्टेशन में सुगुथन के खिलाफ दर्ज सात आपराधिक मामलों को आधार बनाया था। इनमें से छह मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी और ट्रायल लंबित था, जबकि 2026 में दर्ज एक मामला जांच के अधीन था।
हिरासत में होने के कारण सुगुथन पार्षद पद की शपथ नहीं ले पा रहे थे। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब कोर्ट ने सुगुथन को जेल के भीतर ही शपथ लेने की अनुमति दी थी और टिप्पणी की थी कि सिर्फ इसलिए कि कोई चुना हुआ प्रतिनिधि प्रिवेंटिव डिटेंशन में है, जनता के जनादेश को खत्म नहीं किया जा सकता।