
Oath Controversy: केरल हाई कोर्ट ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 बीजेपी पार्षदों के शपथ ग्रहण के विवाद के बाद अब उनके फैसलों को मिली सुरक्षा को चुनौती देने वाली अपील पर नोटिस जारी किया है। पूर्व में उनकी शपथ को पूर्व में अमान्य घोषित कर दिया गया था। यह नोटिस मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव को अमान्य घोषित करने की मांग वाली अपील पर दिया गया है, जिसमें तर्क दिया गया है कि चुनाव में हिस्सा लेने वाले इन पार्षदों की पूर्व शपथ कानूनी रूप से अमान्य थी।
केरल हाईकोर्ट में दायर अपील में कहा गया है कि जिन 20 पार्षदों ने शपथ के निर्धारित कानूनी प्रारूप का पालन नहीं किया, उनके मतदान से चुने गए मेयर और डिप्टी मेयर का निर्वाचन भी अमान्य घोषित किया जाना चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि बीजेपी के इन पार्षदों ने शपथ लेते समय ईश्वर के नाम पर शपथ लेने या सामान्य प्रतिज्ञा करने के बजाय विशिष्ट देवी-देवताओं, 'भारत माता' और राजनीतिक शहीदों के नामों का उल्लेख किया था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह निर्धारित कानूनी प्रारूप के अनुरूप नहीं था। वहीं, केरल हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
केरल उच्च न्यायालय ने बीते 24 जून को तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 20 पार्षदों और पलक्कड़ के वडक्कनचेरी ग्राम पंचायत के कांग्रेस वार्ड सदस्य को चार सप्ताह के भीतर शपथ ग्रहण समारोह में फिर से शपथ लेने का निर्देश दिया था, यह कहते हुए कि शपथ या तो ईश्वर के नाम पर या एक गंभीर प्रतिज्ञा के रूप में ली जानी चाहिए।
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी पार्षद आर. सुगाथन की छुट्टी की अर्जी का कुछ पार्षदों ने विरोध किया। सुगाथन फिलहाल केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (KAAPA) के तहत जेल में बंद हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने पार्षद पद से अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए छुट्टी की अर्जी दी थी। यह अर्जी दो निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से मंजूर की गई।