
Kerala High Court: क्या किसी न्यूज पोर्टल का पूरा फेसबुक पेज बिना कारण बताए और बिना आदेश की कॉपी दिए बंद किया जा सकता है? मलयालम डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'नोकैप' (NoCap) के साथ ऐसा ही हुआ है। मामला अब केरल हाईकोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और फेसबुक की मूल कंपनी मेटा से पूछा है कि क्या पेज को ब्लॉक करने का कोई आदेश दिया गया था।
केरल हाईकोर्ट के जस्टिस जियाद रहमान एए ने सोमवार को इस मामले से जुड़े निर्देश दिए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों से कहा कि वे बताएं कि मेटा को पेज ब्लॉक करने का कोई आदेश भेजा गया था या नहीं। कोर्ट ने मेटा से भी जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।
यह याचिका नोकैप के चीफ एडिटर हैदर अली के ने दायर की है। उनके मुताबिक नोकैप एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज संस्था है, जिसकी शुरुआत नवंबर 2023 में हुई थी। याचिका के अनुसार 28 सितंबर को फेसबुक की ओर से नोकैप को सूचना मिली कि उसका कंटेंट भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है।
इस सूचना में सिर्फ इतना लिखा था कि सरकार के एक नोटिस के तहत, आईटी एक्ट 2000 की धारा 79(3)(b) के आधार पर पेज को भारत में रोका गया है। लेकिन यह नहीं बताया गया कि नोटिस किस अधिकारी या संस्था ने जारी किया, कौन-सा कंटेंट आपत्तिजनक था और पेज रोकने की वजह क्या थी।
याचिका में कहा गया है कि कारण पता न होने से यह जानना मुश्किल है कि कार्रवाई का आधार क्या है। इसलिए अधिकारियों को संबंधित आदेश और सामग्री कोर्ट के सामने रखनी चाहिए। याचिकाकर्ता का कहना है कि बिना किसी गैरकानूनी कंटेंट की पहचान किए पूरा पेज ब्लॉक करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(g) के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पेशे की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उनका यह भी कहना है कि पेज बंद करने से पहले सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।
याचिका के मुताबिक पेज पर रोक से पहले नोकैप के करीब 1.62 लाख फेसबुक फॉलोअर थे। पेज ब्लॉक होने के बाद प्लेटफॉर्म की पहुंच और कमाई, दोनों में गिरावट दर्ज की गई है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि अधिकारियों को ब्लॉकिंग आदेश पेश करने का निर्देश दिया जाए और भारत में नोकैप का फेसबुक पेज फिर से चालू कराया जाए।