
Thiruvananthapuram nagar nigam: केरल के तिरुवनंतपुरम नगर निगम में मेयर पद को लेकर लड़ाई में दिलचस्प मोड़ आ गया है। पूर्व डीजीपी और भाजपा पार्षद आर श्रीलेखा ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया था।
हालांकि, अगले ही दिन पार्टी नेताओं से बातचीत के बाद उन्होंने मन बदल लिया और इस्तीफा वापस ले लिया। यह फैसला भाजपा के लिए राहत भरा है। नगर निगम में पार्टी के पास बहुमत बहुत छोटा है।
बता दें कि 101 सदस्यीय परिषद में भाजपा के 50 सदस्य हैं। बहुमत के लिए 51 वोट चाहिए। एक स्वतंत्र पार्षद के सहारे वीवी राजेश मेयर चुने गए थे। अगर श्रीलेखा का इस्तीफा मान लिया जाता तो भाजपा के सदस्य घटकर 48 रह जाते। सोमवार तक समय था इस मुद्दे को सुलझाने का। पार्टी नेतृत्व ने तुरंत बातचीत शुरू की और श्रीलेखा को मना लिया।
श्रीलेखा सास्टमंगलम वार्ड से चुनी गई हैं। उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की थी। चुनाव प्रचार में वे पार्टी की सबसे चर्चित चेहरा बनी थीं। वाम मोर्चे के 45 साल के शासन को खत्म करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन मेयर पद वीवी राजेश को दिया गया।
श्रीलेखा शुरू से इस बात से नाराज थीं। उन्होंने पहले ही कह दिया था कि वे चुनाव लड़ने को तैयार नहीं थीं। पार्टी ने बार-बार समझाया और आश्वासन दिया कि उन्हें सिर्फ पार्षद नहीं बनाया जाएगा। फिर भी मेयर पद उन्हें नहीं मिला।
श्रीलेखा ने पहले कहा था कि वे पार्टी का फैसला मानती हैं और लोगों की सेवा के लिए पार्षद बनी रहेंगी। लेकिन शनिवार को अचानक इस्तीफा दे दिया। यह कदम पार्टी के लिए झटका था। जिसके बाद भाजपा नेताओं ने उनसे बात की। चर्चा के बाद उन्होंने फैसला बदला और पार्षद पद पर बनी रहने का ऐलान कर दिया।
भाजपा ने तिरुवनंतपुरम में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। वाम दलों के 29 और कांग्रेस के 19 सीटों के मुकाबले 50 सीटें जीतीं। फिर भी पूर्ण बहुमत नहीं था। स्वतंत्र पार्षद के सहारे सत्ता चली।
श्रीलेखा का इस्तीफा अगर कायम रहता तो संख्या और कमजोर पड़ जाती। पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लिया और तुरंत प्रयास शुरू किए। श्रीलेखा पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक का पद भी संभाला है।
राजनीति में आने के बाद उनकी छवि मजबूत रही। सास्टमंगलम में उनकी बड़ी जीत ने पार्टी को ताकत दी थी। मेयर पद न मिलने पर नाराजगी स्वाभाविक थी, लेकिन पार्टी ने उन्हें मनाने में सफलता पाई।