
Kolkata Airport Mosque Controversy: कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में स्थित एक मस्जिद को लेकर विवाद अब केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रह गया है। एयरपोर्ट सुरक्षा, मस्जिद के संभावित स्थानांतरण और जुमे की नमाज के ऐलान ने इस मुद्दे को संवेदनशील बना दिया है। आखिर दो रनवे के बीच बनी इस मस्जिद पर अचानक इतना विवाद क्यों खड़ा हो गया? आइए समझते हैं।
दरअसल, सुरक्षा और तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने एयरपोर्ट परिसर की इस मस्जिद में नमाज अदा करने पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद मस्जिद कमेटी के भीतर ही दो फाड़ हो गए हैं। कमेटी का एक धड़ा इस बात पर राजी है कि सुरक्षा को देखते हुए मस्जिद को कहीं और स्थानांतरित (शिफ्ट) कर दिया जाए, जबकि दूसरा धड़ा इसके सख्त खिलाफ है।
इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब जमीयत उलेमा-ए-हिंद के कद्दावर नेता और राज्य के पूर्व मंत्री सिद्दिकुल्लाह चौधरी इस पाबंदी के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए। चौधरी ने साफ शब्दों में एलान कर दिया कि जुमे की नमाज इसी मस्जिद में होगी। हालांकि, बाद में भारी प्रशासनिक दबाव के बीच वह बांकुड़ा के लिए रवाना हो गए। जाने से पहले उन्होंने कोलकाता पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करने की बात भी कही।
सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट ने तुरंत एक्शन लिया। मस्जिद की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को बैरिकेडिंग लगाकर सील कर दिया गया है।
धारा 163 लागू: पुलिस ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के तहत इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) लागू कर दी है, जिसके तहत लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी है।
इमाम की समझदारी: स्थानीय इमाम और पुलिस के बीच हुई बातचीत के बाद इमाम ने शांति की अपील करते हुए कहा कि वे कानून का सम्मान करेंगे और नमाज किसी अन्य वैकल्पिक स्थान पर अदा कर ली जाएगी।
सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा: एयरपोर्ट के वीआईपी जोन और रनवे के आसपास रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अतिरिक्त पुलिस बल मुस्तैद हैं ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो सके।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर राज्य प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि जुमे की नमाज के दौरान हालात शांतिपूर्ण बने रहते हैं या यह विवाद आगे कोई नया मोड़ लेता है।