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DM ऑफिस के अंदर कैसे बनी मस्जिद? कोर्ट ने अवैध माना, अब 30 दिन में हटाने का आदेश, जानिए 6.41 करोड़ का जुर्माना कैसे तय हुआ

Saharanpur DM Office Mosque Case: सहारनपुर में DM ऑफिस परिसर की मस्जिद को कोर्ट ने सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए 30 दिन में हटाने का आदेश दिया। जानिए 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति कैसे तय हुई।
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कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद

Saharanpur News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जिला कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी मस्जिद को लेकर आए अदालत के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी परिसर के भीतर यह निर्माण आखिर कैसे हुआ और इतने वर्षों तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अब नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने इसे सरकारी जमीन पर बना अवैध निर्माण मानते हुए हटाने का आदेश दिया है। साथ ही 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति भी तय की गई है।

क्या है पूरा मामला?

मामले की शुरुआत एक शिकायत से हुई, जिसमें कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण बताया गया। शिकायत के बाद राजस्व विभाग की ओर से जांच कराई गई। जांच पूरी होने के बाद 24 मार्च 2025 को लोक परिसर अधिनियम, 1972 के तहत अदालत में वाद दायर किया गया। सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की ओर से दावा किया गया कि यह निर्माण 1947 से पहले, ब्रिटिश शासन के समय का है। वहीं प्रशासन ने राजस्व अभिलेखों के आधार पर अदालत में कहा कि जिस जमीन पर मस्जिद बनी है, वह सरकारी रिकॉर्ड में कलेक्ट्रेट परिसर के नाम दर्ज है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नगर मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह की अदालत ने मस्जिद को सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश जारी कर दिया।

30 दिन में हटाना होगा कब्जा

अदालत ने आदेश में कहा है कि संबंधित पक्ष को कब्जा हटाने के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा। यदि तय समय में निर्माण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन को बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई करने का अधिकार होगा।

6.41 करोड़ का जुर्माना कैसे तय हुआ?

इस फैसले का सबसे चर्चित हिस्सा 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति है। अदालत के आदेश के मुताबिक, सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन खसरा संख्या 539 में कलेक्ट्रेट की भूमि दर्ज है। करीब 315 वर्ग मीटर क्षेत्र पर कथित अवैध कब्जा माना गया। अदालत ने यह भी माना कि इस भूमि का लंबे समय तक बिना वैध अधिकार उपयोग किया गया। इसी आधार पर लगभग 70 वर्षों के अवैध अधिभोग को ध्यान में रखते हुए 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 500 रुपये की क्षतिपूर्ति तय की गई। यह राशि सरकारी जमीन के लंबे समय तक कथित अनधिकृत उपयोग के आधार पर निर्धारित की गई है।

सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों में कानून क्या कहता है?

लोक परिसर (अनधिकृत अध्यासियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना वैध अनुमति के सरकारी संपत्ति पर कब्जा करती है, तो सक्षम अधिकारी उसे हटाने का आदेश दे सकता है। इसके अलावा, कब्जे की अवधि और सरकारी संपत्ति के उपयोग को देखते हुए क्षतिपूर्ति (Damages) भी तय की जा सकती है। इसी प्रावधान के तहत सहारनपुर मामले में बेदखली के साथ आर्थिक दंड भी लगाया गया है।

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