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‘देश में लोकतंत्र का कत्ल हो रहा है, विपक्ष के नेताओं को घेरकर मारा जा रहा’, भाजपा पर बरसे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद

Imran Masood on Omar Abdullah: उमर अब्दुल्ला के बयान का समर्थन करते हुए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार और सत्ताधारी दल पर तीखा हमला बोला है। इमरान मसूद ने कहा कि देश के भीतर लोकतंत्र का सरेआम कत्ल किया जा रहा है और अब समय आ गया है कि जनता को इसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए।
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कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Photo: IANS/Qamar Sibtain)

Imran Masood Statement: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देश के मौजूदा हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। देश के अंदर लोकतंत्र का कत्ल हो रहा है। लोगों को इसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए। ये लोग देश को तबाह करके ही छोड़ेंगे। आर्थिक रूप से देश पूरी तरह टूट चुका है।

कांग्रेस सांसद मसूद ने विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाए जाने के आरोपों पर आगे कहा कि देश के राजनीतिक इतिहास में ऐसा दौर कभी नहीं देखा गया, जहां विपक्ष के नेताओं को घेरकर मारा जा रहा हो। उन्होंने पश्चिम बंगाल की हालिया हिंसक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल के अंदर जो कुछ भी हो रहा है, वह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा कलंक है।

उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा था

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायकों को 20 से 30 करोड़ रुपये का लालच देकर और मंत्री पद का प्रलोभन देकर तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पैसे और मंत्री पद का लालच काम न आने पर भाजपा अब बंद दरवाजों के पीछे मेरे विधायकों से कह रही है कि हमारे साथ आ जाओ और हम तुम्हें राज्य का दर्जा दिला देंगे। उमर अब्दुल्ला का कहना है कि बीजेपी जम्मू-कश्मीर में चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को अस्थिर करने और नेशनल कॉन्फ्रेंस में फूट डालने की साजिश रच रही है।

'हमारे सब्र का नाजायज फायदा न उठाएं'

इसके साथ ही उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) देने में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाया और केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा था कि वे उनके सब्र का इम्तिहान न लें और राज्य का दर्जा वापस बहाल करने की स्पष्ट समय-सीमा बताएं। उन्होंने कहा कि हमें धैर्य रखना होगा जैसा कि उन्होंने (लद्दाख) रखा था। धैर्य रखना कमजोरी नहीं है और इसका मतलब यह भी नहीं कि हम चुप रहें। इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठानी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमारे सब्र का नाजायज फायदा उठाएं।

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