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‘मुझे जान से मारने की मिल रही धमकियां’, अग्रिम जमानत याचिका में कुणाल कामरा ने HC से लगाई गुहार

Kunal kamra: मद्रास HC में दी गई याचिका में कुणाल कामरा ने कहा कि जब से यूट्यूब पर उनका वीडियो अपलोड हुआ है। तब से तब से उन्हें सैकड़ों लोगों से जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। 
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Mar 28, 2025
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Kunal kamra

Kunal Kamra: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर अपनी टिप्पणी को लेकर विवाद में आए कॉमेडियन कुणाल कामरा ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। कॉमेडियन ने मामले में याचिका दायर कर अग्रिम जमानत मांगी है। बता दें कि कुणाल कामरा के खिलाफ महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी करने पर मुंबई में एफआईआर दर्ज की गई थी।

कुणाल की वीडियो पर हुआ हंगामा

बता दें कि एकनाथ शिंदे की टिप्पणी वाले कुणाल कामरा के वीडियो पर काफी हंगामा हुआ था। इस मामले में पुलिस ने कॉमेडियन कामरा को दो समन भी जारी किए है, जिसमें 31 मार्च से पहले उन्हें पूछताछ के लिए पेश होने का आग्रह किया है।

याचिका में कामरा ने कही ये बात

मद्रास HC में दी गई याचिका में कुणाल कामरा ने कहा कि जब से यूट्यूब पर उनका वीडियो अपलोड हुआ है। तब से तब से उन्हें सैकड़ों लोगों से जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

HC से मांगाी अग्रिम जमानत

कुणाल कामरा ने मद्रास हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा कि वह तमिलनाडु के विल्लुपुरम शहर के स्थायी निवासी हैं, इसलिए वह मद्रास HC से अग्रिम जमानत चाहते हैं। वहीं डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी के लिए महाराष्ट्र विधान परिषद द्वारा कामरा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दायर किया गया। इस नोटिस में शिवसेना (यूबीटी) नेता सुषमा अंधारे का भी नाम है।

क्लब में शिवसेना समर्थकों ने की थी तोड़फोड़

बता दें कि एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी वाली वीडियो यूट्यूब पर अपलोड होने के बाद शिवसेना समर्थक आक्रोशित हो गए और उन्होंने कॉमेडी क्लब द हैबिटेट में पहुंचकर तोड़फोड़ की। वहीं हैबिटेट ने मीडिया को दिए गए बयान में कहा कि कलाकारों द्वारा परफॉर्म किए जाने वाले कंटेंट से उसका कोई लेना-देना नहीं है और वह अगले नोटिस तक बंद है।

SC का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संदेश

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ सोशल मीडिया पर ‘ऐ खून के प्यासे बात सुनो’ कविता के लिए दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया। SC ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अदालतों को सबसे आगे होना चाहिए।

Updated on:
28 Mar 2025 03:10 pm
Published on:
28 Mar 2025 03:10 pm
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