
बिहार के बाहुबली नेता अनंत सिंह की विधायकी खतरे में है। जद(यू) ने उन्हें पार्टी से निकालने के बाद विधान सभा से भी बाहर करवाने की और्पचारिकता शुरू कर दी है। हालांकि, 'छोटे सरकार' बेफिक्र हैं। पत्रकारों ने जब इस बारे में उनसे सवाल किया तो उन्होंने अपने खास अंदाज में जवाब दिया, 'हमको दिक्कते नहीं है तो तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?' (मुझे समस्या नहीं है तो आपको क्यों हो रही है?)
कोई सवाल असहज लगने पर अनंत सिंह द्वारा पत्रकारों को झिड़क देना उनकी पुरानी आदत और उनके लिए आम बात है। 2007 में भी जब रेशमा खातून की हत्या और बलात्कार मामले में कथित रूप से उनके शामिल होने के आरोपों पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने एनडीटीवी के दो पत्रकारों को थप्पड़ जड़ दिया था। ऐसे कई और उदाहरण भी हैं। इन सब बातों के लिए कभी किसी ने उन पर अंगुली भी नहीं उठाई।
अनंत सिंह ने पार्टी को कभी अपनी राजनीति का आधार नहीं माना और न बनने दिया। यही कारण रहा कि इस बार एमएलसी चुनाव में उन्हें जद(यू) का उम्मीदवार पसंद नहीं आया तो उन्होंने खुले आम जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन दे दिया। पार्टी लाइन से अलग जाकर वह पहले भी काम करते रहे हैं। हमेशा कहते रहे हैं कि वह पार्टी से नहीं, जनता के दम पर विधायक बनते रहे हैं। यह उन्होंने दिखाया भी है। वह निर्दलीय भी जीते हैं, लालू की पार्टी से भी विधायक बने हैं और नीतीश की पार्टी से भी। देखिए यह टेबल:
| कार्यकाल / वर्ष | चुनाव का प्रकार | पार्टी / दल | परिणाम / स्थिति |
| 2005 (फरवरी) | विधानसभा चुनाव | जनता दल (यूनाइटेड) - JD(U) | जीत (पहली बार मोकामा से विधायक बने) |
| 2005 (अक्टूबर) | मध्यावधि चुनाव | जनता दल (यूनाइटेड) - JD(U) | जीत |
| 2010 | विधानसभा चुनाव | जनता दल (यूनाइटेड) - JD(U) | जीत |
| 2015 | विधानसभा चुनाव | निर्दलीय (Independent) | जीत (जेडीयू से अनबन के बाद पार्टी छोड़कर निर्दलीय मैदान में उतरे और जेल से चुनाव लड़े। जीते) |
| 2020 | विधानसभा चुनाव | राष्ट्रीय जनता दल (RJD) | जीत (आरजेडी के टिकट पर विधानसभा पहुंचे) |
| 2022 | उप-चुनाव (Bypoll) | राष्ट्रीय जनता दल (RJD) | जीत (नीलम देवी) — सजा होने के कारण सदस्यता रद्द होने पर उनकी पत्नी नीलम देवी ने आरजेडी टिकट पर उपचुनाव जीता। |
| 2025 | विधानसभा चुनाव | जनता दल (यूनाइटेड) - JD(U) | जीत (कानूनी मामलों से राहत मिलने के बाद पुनः जेडीयू में वापसी की और भारी मतों से विजय प्राप्त की) |
अनंत सिंह का अपना अलग ही स्टाइल है। उनका यह स्टाइल कोई नया नहीं है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया के चलते भले ही लगातार वायरल होता रहता है। इंटरव्यू के दौरान सिगरेट पीना, हथियारबंद लोगों से घिरे रहना, ठेठ अंदाज में जवाब देना, सवाल पसंद नहीं आने पर झिड़क देना…ये सब जो आजकल रील में दिखाई देता है, यह उनकी पुरानी आदत है।
किसी भी रील में अनंत सिंह कैमरे पर अकेले शायद ही कभी दिखाई देते हैं। 2014 में जब चिंकी सिन्हा (तब 'ओपेन' पत्रिका की पत्रकार) उनका इंटरव्यू लेने बैठीं तो कमरे में उन दोनों के अलावा एक दर्जन लोग थे। इनमें कई हथियार लिए थे। एक उनका हैट लेकर आया, दूसरा काला चश्मा और तीसरा उनके लिए सिगरेट सुलगाने लगा। इसी बीच एक महिला भी कमरे में आ गई और बैठ गई। और तो और, इंटरव्यू के बीच में कुछ पल के लिए पालतू हाथी को भी कमरे में ले आया गया। चाय स्टील के गिलास में पिलाई गई। अपने आलेख में चिंकी ने बताया है कि इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही उन्हें सतर्क रहने की हिदायत दी गई थी। इसके तुरंत बाद एक आदमी उन्हें एके-47 दिखाने लगा था। जब अनंत सिंह से पूछा गया, 'ये आपका है?' तो उनका जवाब था, 'हम सरकार हैं।'
अनंत सिंह को उनके इलाके (मोकामा) में लोग 'छोटे सरकार' बुलाते हैं। उनका कहना है कि मछली के तालाब की नीलामी के कारोबार के चक्कर में उनका नाम 'छोटे सरकार' पड़ गया था। वह बोली लगा कर सरकार से तालाब लेते थे और फिर बोली लगा कर मुनाफे में बेच देते थे। उनका कहना है कि वह बोली के लिए इतवार का दिन रखते थे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आ सकें। लोग कहते थे कि नीलामी में जा रहे हैं तो उनसे पूछा जाता था कि इतवार को कौन सी नीलामी होती है? इस पर वे जवाब देते थे कि छोटे सरकार की नीलामी है। इस तरह उनका नाम छोटे सरकार पड़ गया।
अनंत सिंह एक समय साधू बनने निकल गए थे, लेकिन भाई की हत्या के बाद घर लौट गए और हत्यारे से खुद बदला लिया। वह तैर कर गंगा नदी के पार गए और भाई के हत्यारे को मार कर चले आए। इसका उन्हें कोई अफसोस भी नहीं है। पूछे जाने पर वह कहते हैं- इंसाफ करना जरूरी था। यहीं से अपराध से उनका नाता जुड़ा, लोग उनसे खौफ खाने लगे और वह बाहुबली बनते गए।
अपराध से नाम जुड़ने का अनंत सिंह को कभी कोई अफसोस नहीं रहा। 2014 में भी उन्होंने बिना किसी अफसोस के बताया था कि उनके ऊपर 150 मुकदमे दर्ज थे, जिनमें से ज़्यादातर में उन्हें जमानत मिली हुई थी। 2025 के चुनावी हलफनामे में भी उन्होंने 28 आपराधिक मामले दर्ज होने की बात बताई थी। अभी हाल में भी उन्होंने नौ मर्डर करने की बात मानी। हालांकि, इस बयान पर विवाद होने के बाद सफाई भी दी थी।
| विवरण | हलफनामे में दर्ज आधिकारिक आंकड़े |
| अभ्यर्थी का नाम | अनंत कुमार सिंह (Anant Kumar Singh) |
| पिता का नाम | चंद्रदीप सिंह (Chandradeep Singh) |
| पार्टी एवं निर्वाचन क्षेत्र | जनता दल (यूनाइटेड) — मोकामा (178) |
| कुल घोषित संपत्ति | ₹100,61,73,708 (लगभग ₹100.61 करोड़) |
| चल संपत्ति (Movable Assets) | ₹39,73,90,718 (लगभग ₹39.73 करोड़) नकद राशि (Cash): स्वयं के पास लगभग ₹15.61 लाख तथा पत्नी के पास ₹34.60 लाख। वाहन (Vehicles): फॉर्च्यूनर/मर्सिडीज जैसी लग्जरी एसयूवी गाड़ियां। बैंक जमा व निवेश: पंजाब नेशनल बैंक (शाखा बाढ़ एवं पटना) व अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा राशि तथा बॉन्ड/शेयर में निवेश। |
| अचल संपत्ति (Immovable Assets) | ₹60,87,82,990 (लगभग ₹60.87 करोड़) कृषि योग्य भूमि: बाढ़, मोकामा और नदावन क्षेत्र में विस्तृत कृषि योग्य पैतृक भूमि। गैर-कृषि भूमि व व्यावसायिक संपत्ति: पटना (ईस्ट गांधी मैदान, बोरिंग रोड क्षेत्र) और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक परिसर तथा प्लॉट। आवासीय भवन: नदवां (पैतृक आवास) और पटना स्थित आवासीय संपत्ति। |
| कुल देनदारियां (Liabilities) | ₹25,99,55,110 (लगभग ₹25.99 करोड़) |
| वार्षिक आय (ITR 2024-25) | स्व: ₹39,66,064 |
| व्यवसाय/आजीविका का स्रोत | कृषि, व्यापार (Business) एवं समाज सेवा |
| आपराधिक मुकदमों की संख्या | कुल 28 लंबित मामले |
अनंत सिंह के जन्म के बाद उनके पिता साधू बन गए थे। एक बार खुद अनंत सिंह भी अपने गाँव में आए एक साधू के साथ निकल गए थे। बचपन में वह हरिद्वार में साधुओं के साथ रहे, बाद में अयोध्या में भी रहे। वह स्कूल नहीं गए। बचपन में वह सांप भी पकड़ लिया करते थे। आज उनका कहना है कि उनकी इस आदत ने उन्हें भयमुक्त बना दिया और आज उन्हें मौत से भी डर नहीं लगता। उनका दावा है कि उन पर 20 से ज्यादा बार गोलियां चल चुकी हैं।
फिल्मों के शौकीन अनंत सिंह के शौक अनेक हैं। घोड़े, हाथी, मर्सडीज के साथ-साथ बग्गी का भी उन्हें शौक है। दिल्ली में बग्गी की सवारी करते हुए उन्होंने अपना वीडियो भी शूट करवाया है। एक बार बग्गी से उन्हें राष्ट्रपति भवन ले जाया गया। उन्होंने वह बग्गी डिजाइन करने वाले शख्स को खोजवाया और अपने लिए वैसी ही एक बग्गी बनवा डाली। वह बग्गी पटना लेकर आए और कई बार उन्हें उसी से विधान सभा आते-जाते देखा गया। यह बात आज की नहीं, सालों पुरानी हो गई है।
अनंत सिंह को घुड़सवारी का भी शौक है और घुड़दौड़ में वह कई ट्रॉफी भी जीत चुके हैं। हालांकि, अब वह घुड़सवारी नहीं करते हैं, पर उनके पास लाखों रुपये के कई घोड़े अभी भी हैं। एक बार उन्होंने लालू यादव का बादल नाम का एक घोड़ा खरीद लिया था। घोड़ा दौड़ नहीं सकता था, क्योंकि उसके पैर जख्मी थे। फिर भी अनंत सिंह ने आन में एक लाख रुपये में उसे खरीद लिया था। यह 2007 के सोनपुर मेले की बात है। लालू उन्हें घोड़ा बेचना नहीं चाहते थे। बक़ौल अनंत सिंह उन्होंने अपने आदमियों से उन्हें बर्बाद कर देने की धमकी भी भिजवाई। फिर भी 'छोटे सरकार' ने बादल को खरीदा। घोड़ा ज्यादा दिन जिंदा नहीं रहा, लेकिन अनंत सिंह के कमरे की दीवार पर उसकी फोटो सालों तक टंगी रही।