
सांसद अरविंद सावंत। फाइल फोटो- पत्रिका
Chief Election Commissioner: शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने चुनाव आयोग के हलफनामे को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारी झूठ बोलने में माहिर हैं। सावंत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी गलत जानकारी दाखिल करने से पहले अधिकारियों को शर्म करनी चाहिए। सावंत ने कहा कि वे झूठ बोलने में माहिर हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त झूठों के सरदार हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारियों को पता है कि कानूनी रूप से उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा, इसलिए वे मनमानी कर रहे हैं। सांसद ने तीनों चुनाव आयुक्तों का नार्को टेस्ट कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर उठी आपत्तियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि पिछले 10 साल में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई गईं। सावंत ने कहा कि इस पूरे मामले में सच्चाई सामने आनी चाहिए।
गौरतलब है कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठे सवालों पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा पेश कर अपना पक्ष रखा था। आयोग ने उन आरोपों को खारिज किया था, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अकेले फैसले लेने की बात कही गई थी। आयोग के अनुसार एसआईआर से संबंधित जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 में जारी तीनों आदेश सभी सदस्यों की सहमति से पारित किए गए थे।
हलफनामे को ज्ञानेश कुमार सहित दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली थी। वोटर लिस्ट में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव के आरोपों पर भी आयोग ने सफाई दी थी। आयोग ने स्पष्ट किया था कि किसी प्रस्ताव पर विचार के दौरान फाइल में दर्ज अधिकारियों या आयुक्तों की टिप्पणियों, सवालों और सुझावों को अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। आयोग की कार्यप्रणाली के अनुसार, फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे आयुक्त और उसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के पास मंजूरी के लिए जाती है।
जरूरी मामलों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी स्वीकृति ली जाती है, जिसे बाद में संबंधित फाइल में दर्ज कर दिया जाता है। हलफनामे में आयोग ने 28 जुलाई को जारी एक आदेश का भी उल्लेख किया था। आयोग के मुताबिक, काम के बंटवारे से संबंधित यह आदेश प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। इसके अगले दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस मामले में कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा। आयोग ने बताया कि 30 जुलाई को दोनों चुनाव आयुक्तों के संयुक्त निर्देश जारी होने के बाद यह आदेश लागू नहीं किया गया।
Updated on:
27 Oct 2026, 7:22 PM IST
Published on:
27 Oct 2026, 6:47 PM IST
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