मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस संकट गहराया, जिससे भारत के कई राज्यों में उद्योग प्रभावित हुए। फैक्टरियां बंद होने लगीं और लाखों प्रवासी मजदूर रोजगार छिनने के कारण यूपी, बिहार और गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं।
Lpg Crisis In India: सूरत के ऊधना रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में चढ़ने की मशक्कत हो या दिल्ली के आनंद विहार स्टेशन पर यूपी-बिहार जाने की भीड़, राजस्थान के कोटपूतली में ऑर्डर के इंतजार में बैठे ट्रक ऑपरेटर हों या बेंगलूरु-हैदराबाद में युवा टेक पेशेवरों को रेस्टारेंट से लौटाते फ्रंट ऑफिस मैनेजर…पश्चिमी एशिया में लड़ी जा रही अमरीका-ईरान जंग के 'घाव' यहां तक महसूस हो रहे हैं। पिछले 35 दिन से लड़ी जा इस रही जंग से उपजे तेल-गैस संकट के कारण फैक्टरियों में उत्पादन प्रभावित होने या खुद का छोटा ठप होने के कारण गुजरात, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र व तेलंगाना से लाखों प्रवासी श्रमिक घरों को लौट रहे हैं। इन राज्यों से श्रमिक उत्तर प्रदेश, बिहार व ओडिशा की ओर जा रहे हैं तो जयपुर-जोधपुर-इंदौर जैसे छोटे शहरों से लोग अपने ही प्रदेश के गांवों में लौट रहे हैं।
गैस व केमिकल आधारित औद्योगिक इकाइयों में या तो उत्पादन बंद कर दिया गया है या शिफ्टें घटा दी गई है और मजदूरों को कहीं हालात सुधरने पर आने को कहा गया है। शहरों में औद्योगिक क्षेत्रों व बाजारों में रेहड़ी, पटरी, ढाबा, फेरी वाले व छुट-पुट व्यवसाय करने वाले लोगों को गैस सिलेंडर के अभाव में काम रोकना पड़ा है और घर लौटने को मजबूर होना पड़ा है।
सूरत टैक्सटाइल उद्योग में छह लाख से अधिक पावरलूम, एयरजेट और वाटरजेट मशीनें गैस पर निर्भर हैं। सप्लाई बाधित होने से कई कारखाने केवल एक शिफ्ट में चल रहे हैं। डाइंग यूनिट्स को सप्ताह में तीन दिन बंद रखने की नौबत आ गई है। सचिन इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव सोसाइटी के सचिव मयूर गोलवला ने बताया गैस संकट के चलते लगभग 5 लाख श्रमिकों का पलायन हो चुका है। इसका असर होटल व्यवसाय पर भी पड़ा है।
दहेज और अंकलेश्वर में गैस और पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की अनियमित आपूर्ति के चलते दहेज की कई यूनिट्स को क्षमता से कम पर चलाना पड़ रहा है। वलसाड जिले के वापी, सरीगाम, दमण और दादरा-नगर हवेली में प्लास्टिक, केमिकल, पेपर और पैकेजिंग उद्योग प्रभावित हैं, फैक्टरियों में काम कम होने और एलपीजी संकट के कारण मजदूर यूपी-बिहार-मध्यप्रदेश-ओडिशा लौट रहे हैं।
कोटपूतली के केशवाना इंडस्टि्रयल एरिया में गैस संकट के चलते औद्योगिक इकाइयां बंद हो गई। करीब 100 से 150 श्रमिक यहां से पलायन कर गए। मोरबी में टाइल्स फैक्टरियां बंद होने से शाहपुरा (जयपुर) का ट्रांसपोर्ट व्यवसाय प्रभावित हुआ है। ट्रक चालकों की रोजी-रोटी पर संकट है। जयपुर-जोधपुर में छोटे व्यवसाय प्रभावित होने से आर्थिक और गैस नहीं मिलने से मजदूरों को खाना पकाने का संकट है। आजीविका ब्यूरो के सर्वे के अनुसार 10-20 प्रतिशत तक मजदूर जयपुर से पलायन कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार लौटने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण जयपुर, जोधपुर, उदयपुर जैसे पर्यटन केंद्रों पर रेस्टोरेंट व होटल व्यवसाय पर असर के कारण दिहाड़ी मजदूरों व अस्ठाई कर्मचारियों की नौकरियां अस्थाई रूप से छिनी हैं।
मध्यप्रदेश में दोहरी समस्या है। इंदौर व अन्य औद्योगिक शहरों में गैस, केमिकल व अन्य जरूरी कच्चे माल के संकट व निर्यात ऑर्डर कम होने से प्रभावित फैक्टरियों में शिफ्टें कम की गई हैं। दूसरी ओर रोजगार पर संकट के कारण गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुरुग्राम और राजस्थान से रोजाना बसों में भरकर मजदूर अपने घर लौट रहे हैं। अहमदाबाद इंडस्ट्रियल एरिया और मोरबी में कारखाने प्रभावित होने से भिण्ड के दो हजार मजदूरों का काम-धंधा छिन गया है। इंदौर के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में पीवीसी, पाइप, बोतलें बनाने वाले कारखानों में 50 प्रतिशत गैस कम मिलने से दो-तीन के बजाय एक ही शिफ्ट चल रही हैं। 20 हजार से अधिक लोगों का रोजगार सीधे खत्म हुआ है और अप्रत्यक्ष रूप से 10 हजार लोगों का काम खत्म हुआ है। श्रमिक अपने गांव जा रहे हैं।