
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर बागी गुट में शामिल होने के बाद भी मदन मित्रा का ममता बनर्जी से मोह खत्म नहीं हुआ है। जाते-जाते मदन ने ऐसा बयान दिया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि आगे वह ममता बनर्जी के साथ आ सकते हैं।
मदन मित्रा ने मीडिया से बात करते हुए कहा- ममता अकेली नहीं हैं, उन्हें बहुत से लोगों का समर्थन हासिल है, वह पार्टी को फिर से खड़ा कर लेंगी। टीएमसी में बगावत के बाद ममता के लिए यह बड़ा बयान माना जा रहा है।
वहीं, बागी गुट में शामिल होने पर मदन मित्रा ने कहा- मैं लगभग 30 साल तक ममता बनर्जी के साथ रहा, लेकिन हालात बदल गए हैं और मुझे नहीं पता कि और क्या कहूं। उनमें लड़ने की हिम्मत नहीं है और वे बदलाव लाने में सक्षम नहीं हैं। अगर हम एकजुट रहें, तो भाजपा एक साल के भीतर कमजोर हो जाएगी क्योंकि उनके पास जमीनी स्तर पर मजबूत कैडर नहीं है।
मदन के जाने के बाद ममता बनर्जी ने उन पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- हमें अंदाजा था कि मदन मित्रा पाला बदल सकते हैं क्योंकि उन्हें और उनके परिवार को समन मिला था; जिनकी 'सेटिंग' है, वे भाजपा की 'वॉशिंग मशीन' में शामिल हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा- आज हमारे पास 18 सांसद हैं। हां, कुछ लोगों को धमकाया जा रहा है। आज भी एक व्यक्ति ने पार्टी छोड़ दी। उसने कल मुझसे कहा था कि उसके परिवार को धमकाया जा रहा है। मैं यही कहूंगी - जो लोग जाना चाहते हैं, वे जा सकते हैं। अगर मैं 2006 में (पार्टी को) फिर से शुरू कर सकती हूं, तो 2026 में भी ऐसा कर सकती हूं।
टीएमसी के अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ रही है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी दो गुटों में बंट गई है।
एक तरफ ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी का गुट है, तो दूसरी तरफ रिताब्रत बनर्जी जैसे नेता रियल टीएमसी का दावा कर रहे हैं। पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर भी विवाद चल रहा है।