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‘नेक्टर ना होता तो आज 3 लाशें होतीं’,पालतू डॉगी ने तेंदुए से मोर्चा ले भगा दिया, पर चली गई उसकी जान

दक्षिण गुजरात का यह इलाका, यानी नवसारी, सूरत, तापी और डांग जिला, तेंदुओं का घर माना जाता है। यहां इंसानों की बस्तियों के बिल्कुल करीब बड़ी तादाद में तेंदुए रहते हैं।
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German Shepherd fights leopard

पालतू जर्मन शेफर्ड ने बचाई तीन मजदूरों की जान ।

Nectar Dog Leopard Fight Navsari: रात करीब सवा बारह बजे का वक्त था। गुजरात के नवसारी जिले के गोधवानी गांव में एक आम के बगीचे में तीन मजदूर खुले में चारपाई डालकर सो रहे थे। पास ही एक चारपाई से बंधा था एक जर्मन शेफर्ड कुत्ता, नाम था नेक्टर। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में क्या होने वाला है।

देर रात पास के खेत से एक तेंदुआ चुपचाप निकला और सोते हुए मजदूरों की तरफ बढ़ने लगा। लेकिन इतनी रात में भी जग रहे नेक्टर की नजर उस पर पड़ चुकी थी। वह जोर-जोर से भौंकने लगा और तेंदुए को ललकारने लगा। भौंकने की आवाज से तीनों मजदूर नींद से जाग गए और सामने जो नजारा था, वो किसी की भी रूह कंपा दे। नेक्टर और तेंदुए के बीच खूनी लड़ाई छिड़ चुकी थी।

मजदूर मौका देखकर सुरक्षित जगह भाग निकले। लेकिन नेक्टर, जो चारपाई से जंजीर से बंधा था, वहीं डटा रहा। तेंदुए ने उसके सीने और पसलियों पर गहरे पंजे मारे और मांस के टुकड़े नोच डाले। कुछ ही देर में तेंदुआ अंधेरे में गायब हो गया, और पीछे छूट गया लहूलुहान नेक्टर, जिसने वहीं दम तोड़ दिया।

जर्मन शेफर्ड ने बचाई तीन मजदूरों की जान

यह बगीचा नवसारी के डॉक्टर विशाल पटेल का है, जो पास के वांसदा तालुका में एक अस्पताल चलाते हैं। मंगलवार सुबह जब उन्हें बगीचे के केयरटेकरों से यह खबर मिली, तो वो टूट गए। डॉक्टर पटेल ने कहा, ‘अगर नेक्टर वहां नहीं होता, तो केतन पटेल, क्रुणाल पटेल और हरेश भोया - इन तीनों मजदूरों की जान पर बन आती।‘

पिछले ढाई साल से नेक्टर सिर्फ एक पालतू कुत्ता नहीं, बल्कि डॉक्टर पटेल के परिवार का हिस्सा बन चुका था। दो महीने की उम्र में एक पेट शॉप से लाया गया यह जर्मन शेफर्ड घर के सबसे प्यारे सदस्यों में से एक था। ‘नेक्टर मेरा कुत्ता नहीं, मेरा बच्चा था। रोज शाम को अस्पताल से लौटकर उसके साथ खेलना ही दिनभर की थकान मिटाने का जरिया होता था,’ डॉक्टर पटेल ने भारी मन से बताया। पिछले कुछ महीनों से नेक्टर को बगीचे की रखवाली के लिए वहीं रखा गया था।

बड़ी संख्या में तेंदुए पाए जाते हैं इस इलाके में

दक्षिण गुजरात का यह इलाका, यानी नवसारी, सूरत, तापी और डांग जिला, तेंदुओं का घर माना जाता है। यहां इंसानों की बस्तियों के बिल्कुल करीब बड़ी तादाद में तेंदुए रहते हैं। वांसदा नेशनल पार्क, पूर्णा वन्यजीव अभयारण्य और शूलपाणेश्वर अभयारण्य जैसे छोटे संरक्षित इलाकों को छोड़ दें, तो यहां का पहाड़ी और जंगली इलाके में तेंदुए बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। नवसारी जिले की करीब 70 फीसदी जमीन खेती की है, और गन्ने के खेत तेंदुओं के लिए एकदम मुफीद ठिकाना हैं। तेंदुआ बेहद चालाक और फुर्तीला जानवर होता है, जो इंसानों के आसपास रहना सीख चुका है क्योंकि यहां उसे आसानी से शिकार मिल जाता है जैसे-मवेशी, पालतू कुत्ते, और कचरे के ढेर में पड़ा खाना।

नेक्टर ने जमकर लिया मोर्चा

घटना की जानकारी मिलते ही डॉक्टर पटेल ने वन विभाग को सूचना दी। चिखली के वन अधिकारी किशोर पटेल मौके पर पहुंचे और बगीचे में तेंदुए के पंजों के निशान मिले। उन्होंने कहा, ‘हमने नेक्टर के शरीर पर लगे जख्म देखे हैं, इससे साफ है कि दोनों जानवरों के बीच बहुत भीषण लड़ाई हुई थी। हमने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगा दिया है।‘वन अधिकारी ने डॉक्टर पटेल को यह सलाह भी दी कि आगे से मजदूरों को खुले में सोने न दिया जाए, ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।

नेक्टर की कहानी अब सिर्फ एक कुत्ते की मौत की खबर नहीं रह गई। यह उस वफादारी की मिसाल बन गई है, जो हर कुत्ते के डीएनए में बसी होती है, अपने परिवार के लिए जान की बाजी लगा देना, बिना ये सोचे कि सामने कौन खड़ा है।