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TVK प्रमुख थलापति विजय के खिलाफ FIR की मांग, आयकर मामले में मद्रास हाई कोर्ट में याचिका

Madras High Court: तमिलनाडु में TVK प्रमुख विजय के खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर कर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच की मांग की गई है। कोर्ट ने मामले की स्वीकार्यता पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।

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May 06, 2026
Thalapathy Vijay Tamilnadu CM Prediction (सोर्स- एक्स)

Thalapathy Vijay: कोडुंगैयूर निवासी ने मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) में याचिका दायर कर तमिनलनाडु मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार और TVK प्रमुख थलापति विजय के खिलाफ धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने की मांग की है। आरोप है कि उन्होंने वित्तीय लेन-देन छिपाए और पारिश्रमिक के रूप में बिना हिसाब का नकद प्राप्त किया।

मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी अरुल मुरुगन की पीठ ने 8 अप्रैल के एक आदेश के माध्यम से रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि इस मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए, ताकि इसकी स्वीकार्यता (maintainability) पर फैसला लिया जा सके। यह आदेश हाल ही में जारी किया गया था, और इस मामले की सुनवाई अदालत की गर्मियों की छुट्टियों के बाद होने की संभावना है।

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याचिकाकर्ता का क्या है कहना?

याचिकाकर्ता एम राजकुमार ने अदालत से अनुरोध किया है कि आयकर विभाग को निर्देश दें कि वह 30 सितंबर 2015 को विजय के निवास पर हुई तलाशी में मिले दस्तावेजों, दर्ज बयान, आकलन प्रक्रिया और 1.5 करोड़ रुपए के जुर्माने के आदेश की जांच करे और आयकर अधिनियम के तहत उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करें।

उन्होंने यह भी मांग की कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 470, 471 और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत FIR दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया जाए। ये आरोप आय छिपाने, बिना हिसाब नकद पारिश्रमिक लेने और तलाशी के दौरान सामने आए वित्तीय लेन-देन को छिपाने से जुड़े हैं।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि अदालत आयकर विभाग को निर्देश दे कि वह तलाशी, आकलन और जुर्माना प्रक्रिया में जुटाए गए साक्ष्यों को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण कानून (PMLA) के तहत सक्षम प्राधिकरणों के सामने पेश करे, ताकि अपराध और उससे अर्जित संपत्ति की जांच की जा सके।

रजिस्ट्री ने याचिका को नंबर देने से किया था इनकार

हाई कोर्ट की रजिस्ट्री ने इस याचिका को नंबर देने से इनकार कर दिया था, इसलिए इस मामले को अदालत के संज्ञान में लाया गया। 'पी. सुरेंद्रन मामले' में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्य करने की शक्ति रजिस्ट्री को नहीं सौंपी जा सकती है; रजिस्ट्री का काम केवल याचिकाकर्ताओं और वकीलों द्वारा दायर किए गए मामले के कागजात की औपचारिकता और क्रमबद्धता की जांच करना है।

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Updated on:
06 May 2026 10:35 pm
Published on:
06 May 2026 09:46 pm
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