
Cow slaughter: बकरीद (ईदुल-जुहा) के करीब आते ही महाराष्ट्र सरकार ने पशु वध को लेकर कड़ा रुख अपना लिया है। महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने शनिवार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति गाय की हत्या या गोमांस की अवैध बिक्री में लिप्त पाया गया, तो उस पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। बावनकुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि त्योहारों और धार्मिक आयोजनों को सिर्फ निजी स्थानों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक स्थलों पर वध और कानून तोड़ने वालों को खुले तौर पर चेताया है।
मंत्री ने कहा, 'राज्य सरकार गोहत्या या मांस बेचने वालों पर मकोका लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। बकरीद का त्योहार घरों के भीतर मनाएं, सड़कों पर नहीं। अगर किसी ने नियम तोड़ा, तो सरकार उसे बिल्कुल नहीं बख्शेगी।' इसके साथ ही त्योहार पर पशु संरक्षण कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
इस बीच, बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि वे ईदुल-जुहा पर गाय की कुर्बानी न दें। अंसारी ने सरकार से मांग की है कि गाय को आधिकारिक तौर पर भारत का 'राष्ट्रीय पशु' और 'राष्ट्रीय विरासत' घोषित किया जाए, ताकि गोहत्या और मॉब लिंचिंग जैसी हिंसक घटनाओं पर हमेशा के लिए लगाम लग सके। उन्होंने एएनआई से बात करते हुए कहा, 'भारत में हिंदू भाई गाय को 'गोमाता' मानते हैं। मुसलमानों को देश के कानून और इस श्रद्धा का सम्मान करना चाहिए और गोहत्या से पूरी तरह दूर रहकर गायों की सेवा करनी चाहिए।'
वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली में भी विकास मंत्री कपिल मिश्रा ने विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर बकरीद पर पशु कल्याण कानूनों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। मिश्रा ने साफ कहा कि कुर्बानी केवल तय और अधिकृत जगहों पर ही होनी चाहिए। गाय, बछड़े, ऊंट और अन्य प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने अधिकारियों को सुनिश्चित करने को कहा कि सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में कोई वध न हो। साथ ही, पशुओं का खून नालियों में न बहे और अवशेषों का निपटान तय सुरक्षा मानकों के मुताबिक ही किया जाए।
सरकार के इस कड़े फैसले और इकबाल अंसारी के सकारात्मक बयान पर समाज के दोनों वर्गों से शांति और कानून-व्यवस्था के पक्ष में प्रतिक्रियाएं देखने को मिलेंगी। मुस्लिम बुद्धिजीवियों द्वारा गोहत्या से बचने की अपील सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाली है।
आने वाले दिनों में पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से महाराष्ट्र और दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में गश्त और निगरानी बढ़ाई जाएगी। यह देखना अहम होगा कि जमीनी स्तर पर मकोका की चेतावनी का किस प्रकार पालन सुनिश्चित किया जाता है।
राजनीतिक बयानबाजी से अलग, एक मुस्लिम पक्षकार (इकबाल अंसारी) की ओर से गाय को 'राष्ट्रीय पशु' घोषित करने की वकालत करना एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक विमर्श खड़ा करता है। यह कदम 'मॉब लिंचिंग' रोकने का एक अनोखा कानूनी समाधान सुझाता है। (इनपुट: ANI)