
Mahesh Jethmalani on TMC NCPI Merger: टीएमसी के बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय को लेकर उठ रहे सवालों पर वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा कि यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत हो सकता है। उन्होंने बताया कि दल-बदल विरोधी कानून के मुताबिक अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद किसी दूसरे दल में शामिल होने का फैसला करते हैं तो उन्हें ऐसा करने की अनुमति होती है।
जेठमलानी ने कहा कि 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय इसी नियम के तहत आता है। वहीं, ममता बनर्जी गुट के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि इस विलय को चुनौती देने में उन्हें कोई खास कानूनी आधार नजर नहीं आता है।
एनसीपीआई में विलय करने वाले 20 बागी सांसदों में शामिल टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि लोकसभा में उनके साथ कुल 20 सांसद हैं। उन्होंने कहा कि इसे विश्वासघात नहीं कहा जा सकता है क्योंकि देश का संविधान दो-तिहाई सांसदों के समर्थन से होने वाले विलय की अनुमति देता है।
सुदीप बंद्योपाध्याय के मुताबिक, यदि दो-तिहाई से कम सदस्य किसी दल को छोड़ते हैं तो उसे दल-बदल या विश्वासघात माना जा सकता है, लेकिन मौजूदा मामले में ऐसा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि 'असली टीएमसी' कौन है, इसका फैसला अंततः अदालत करेगी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में मौजूदा संकट की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर नाराजगी जतानी शुरू की। 14 जून को बागी सांसदों के समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की मांग करते हुए पत्र सौंपा। सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने दावा किया कि टीएमसी से निर्वाचित 20 सांसद उनके साथ हैं और यह संख्या पार्टी के कुल लोकसभा सांसदों के दो-तिहाई से अधिक है। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी (NCPI) में विलय का फैसला किया है और आगे एनडीए को समर्थन देंगे।
बागी खेमे के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने भी विलय के फैसले की पुष्टि की थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि वे खुद को असली टीएमसी मानते हैं और इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी। बागी सांसदों का दावा है कि संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दो-तिहाई सांसदों के समर्थन से किया गया यह विलय वैध है। इसी आधार पर उन्होंने लोकसभा में अलग पहचान की मांग रखी।
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात से पहले बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की थी। बताया गया कि इस बैठक में त्रिपुरा से भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब भी मौजूद थे। इसी दौरान भविष्य की राजनीतिक रणनीति, एनसीपीआई में विलय और एनडीए को समर्थन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसके बाद घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा और टीएमसी के भीतर सियासी संकट गहरा गया।
ममता बनर्जी इस पूरे घटनाक्रम को चुनौती देने की तैयारी में है। जबकि बागी सांसदों का कहना है कि उनका कदम संविधान और दल-बदल विरोधी कानून के अनुरूप है। इसी बीच वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने भी कहा है कि यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक नए राजनीतिक दल में विलय का फैसला करते हैं तो संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत ऐसा करना कानूनी रूप से संभव है। उनके मुताबिक, 20 सांसदों के एनसीपीआई में विलय को चुनौती देने में ज्यादा कानूनी दम नजर नहीं आता।