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बंगाल चुनाव से पहले SIR पर कोर्ट का बड़ा फैसला, ममता बनर्जी हो गई ‘खुश’, बोलीं, ‘मुझे कोर्ट पर गर्व’

Bengal Elections 2026: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बड़ा फैसला लेते हुए लाखों लंबित अपीलों पर समयसीमा तय की। योग्य मतदाताओं को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी करने का निर्देश दिया गया। ममता बनर्जी ने फैसले का स्वागत करते हुए न्यायपालिका पर गर्व जताया।

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Apr 16, 2026
Mamata Banerjee, Supreme Court(AI Image-ChatGpt)

Supreme Court: पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया और चुनाव से पहले साफ दिशा-निर्देश जारी कर दिए। दरअसल, मतदाता सूची से नाम हटाने और उस पर आपत्तियों से जुड़े लाखों मामले लंबित थे। करीब 34 लाख अपीलें अभी भी फैसले का इंतजार कर रही थीं। ऐसे में चिंता यह थी कि कहीं लोग अपने वोट के अधिकार से वंचित न रह जाएं। कोर्ट ने इसी चिंता को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया के लिए टाइमलाइन तय कर दी है। 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले, जिन लोगों की अपील पर 21 अप्रैल तक फैसला आ जाएगा, वे वोट डाल सकेंगे। यानी अगर ट्रिब्यूनल ने आपको राहत दे दी, तो आपका नाम तुरंत शामिल किया जाएगा।

अब ये लोग डाल सकेंगे वोट


इसी तरह, दूसरे चरण के लिए भी व्यवस्था बनाई गई है। 29 अप्रैल को वोटिंग है, और जिनकी अपील पर 27 अप्रैल तक फैसला हो जाएगा, वे भी मतदान के हकदार होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को साफ कहा है कि ऐसे मामलों के लिए अलग से सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की जाए। मतलब, जिनका नाम पहले हट गया था लेकिन अब ट्रिब्यूनल ने उन्हें सही ठहराया, उनका नाम नई सूची में जोड़कर वोट डालने का मौका दिया जाएगा।

ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट मिलना मतलब मतदान के लिए योग्य


कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर किसी को ट्रिब्यूनल से क्लीन चिट मिलती है, तो उसे योग्य मतदाता माना जाएगा। साथ ही यह भी कहा गया कि वोट देना सिर्फ कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं से भी जुड़ा हुआ हक है। इसलिए किसी को इससे दूर रखना सही नहीं।

ममता बनर्जी ने कहा, कोर्ट पर 'गर्व'


इस फैसले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(Mamata Banerjee) ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि वे लोगों से धैर्य रखने को कह रही थीं और अब कोर्ट के आदेश से रास्ता साफ हो गया है। उनका कहना था कि यह फैसला उनकी याचिका पर आधारित है और उन्हें न्यायपालिका पर गर्व है। उन्होंने अधिकारियों से भी अपील की कि मतदाता सूची समय पर जारी की जाए, ताकि किसी को भी परेशानी न हो। उनके मुताबिक, यह फैसला लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम है।

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