
ACB Action: सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने में महज दो दिन बाकी थे, लेकिन मालेगांव नगर निगम आयुक्त रवींद्र जाधव रिश्वत मांगने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के शिकंजे में आ गए। एक ठेकेदार का बिल पास करने के बदले 80 हजार रुपए की रिश्वत मांगने के आरोप में एसीबी ने यह कार्रवाई की। अधिकारियों ने आयुक्त के आवास की तलाशी भी ली है। इस मामले में आयुक्त समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। घटना से मालेगांव के प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।
जानकारी के अनुसार मालेगांव नगर निगम आयुक्त रवींद्र जाधव पर एक ठेकेदार के बिल पास करने के बदले चार फीसदी के हिसाब से 80 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप है। इस शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने कार्रवाई की। मामले में आयुक्त के साथ दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। रवींद्र जाधव 31 अक्टूबर 2026 को सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले थे। ऐसे में सेवानिवृत्ति से ठीक पहले रिश्वत मांगने के आरोप में कार्रवाई होने से यह मामला चर्चा में आ गया है। एसीबी की कार्रवाई के बाद आयुक्त के आवास की तलाशी भी ली गई।
रवींद्र जाधव का नाम इससे पहले भी रिश्वत के एक मामले में सामने आ चुका है। 14 जनवरी 2019 को जब वे धुले नगर निगम में उपायुक्त के पद पर कार्यरत थे और प्रभारी अतिरिक्त आयुक्त का काम भी संभाल रहे थे, तब एसीबी ने उन्हें उनके आवास पर एक शिक्षक से 15 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा था। अब मालेगांव में रिश्वत मांगने के आरोप में दोबारा कार्रवाई होने से उनके कार्यकाल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
रवींद्र जाधव ने 16 दिसंबर 2023 को मालेगांव नगर निगम आयुक्त और प्रशासक के रूप में कार्यभार संभाला था। उनकी नियुक्ति के समय भी स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ था। मालेगांवकर विधायक संघर्ष समिति ने उनके खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए थे। समिति की मांग थी कि विवादों में रहे अधिकारी को नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए। कुछ स्थानीय संगठनों और समूहों ने भी उनकी नियुक्ति और कामकाज का विरोध किया था।