
एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस। फाइल फोटो- पत्रिका
Eknath Shinde: महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीटों में से तीन पर हार के बाद सत्ताधारी महायुति में आपसी खींचतान शुरू हो गई है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने इस हार के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को जिम्मेदार ठहराया तो अब शिवसेना ने भी पलटवार किया है। शिवसेना के प्रवक्ता आनंद परांजपे ने पुणे शिक्षक सीट पर हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए नागपुर में हार के लिए भाजपा को आत्ममंथन करने की सलाह दी है।
आनंद परांजपे ने कहा कि महायुति में बेहतर तालमेल होता तो विधान परिषद की पांचों सीटें जीती जा सकती थीं। सबसे बड़ा दल होने के नाते भाजपा की यह जिम्मेदारी थी। विधान परिषद चुनाव की घोषणा के बाद महायुति की समन्वय समिति की बैठक में चार सीटों पर सहमति बनी थी। हालांकि शिवसेना पहले दिन से ही पुणे स्नातक या पुणे शिक्षक सीट में से एक सीट देने की मांग कर रही थी। इसके बावजूद भाजपा ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए। इसके बाद शिवसेना ने निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को समर्थन दिया। मराठवाड़ा स्नातक सीट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने चुनाव लड़ा।
भाजपा के नवनाथ बन ने आरोप लगाया था कि शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार ने महायुति के उम्मीदवार के खिलाफ काम किया। इस पर परांजपे ने कहा कि वह नवनाथ बन से आग्रह करते हैं कि वे यह भी पता लगाएं कि भाजपा विधायक प्रशांत बंब और पार्टी के दूसरे विधायकों ने इस सीट पर किस उम्मीदवार के लिए काम किया। परांजपे ने कहा कि महायुति के उम्मीदवार सतीश चव्हाण ने विधानसभा चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के टिकट पर प्रशांत बंब के खिलाफ चुनाव लड़ा था। ऐसे में भाजपा को यह भी पता लगाना चाहिए कि उसके विधायकों ने किस उम्मीदवार का समर्थन किया।
आनंद परांजपे ने अमरावती शिक्षक सीट का जिक्र करते हुए कहा कि यहां शिवसेना के किरण सरनाईक के खिलाफ भाजपा के तीन बागी नेताओं ने चुनाव लड़ा था। भाजपा ने इन तीनों नेताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया था, लेकिन वे चुनाव प्रचार में जुटे रहे। इसके बावजूद किरण सरनाईक चुनाव जीत गए। परांजपे ने कहा कि शिवसेना ने इस मामले में भाजपा पर कोई आरोप नहीं लगाया और भविष्य में भी ऐसा नहीं करेगी।
नागपुर स्नातक सीट पर हार को लेकर विपक्ष पहले ही भाजपा को घेर रहा है। अब उसकी सहयोगी शिवसेना ने भी इस मुद्दे पर भाजपा को घेरा है। परांजपे ने कहा कि नागपुर में भी भाजपा को आत्ममंथन करने की जरूरत है। यहां भाजपा के पूर्व विधायक अनिल सोले ने बगावत की थी और नामांकन वापस नहीं लिया था। बाद में सोले ने भाजपा उम्मीदवार को समर्थन दे दिया, जिससे मुकाबला सीधा हो गया। इसके बावजूद जो नतीजा आया, वह सबके सामने है। उन्होंने कहा कि भाजपा को आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा खुद को दुनिया, देश और महाराष्ट्र का सबसे बड़ा दल बताती है। ऐसे में गठबंधन के सहयोगियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आनंद परांजपे ने कहा कि महायुति के स्तर पर चुनाव परिणाम की समीक्षा की जाएगी। पांचों सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन गठबंधन को तीन सीटों पर जीत और दो पर हार मिली। इसकी वजहों का पता लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक-दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय तीनों दलों को यह देखना चाहिए कि भविष्य में उनके बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जा सकता है।
Updated on:
29 Oct 2026, 2:53 PM IST
Published on:
29 Oct 2026, 2:53 PM IST
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