
CJI सूर्यकांत। (फोटो - चैटजीपीटी)
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठग आम लोगों को डराकर आए दिन लाखों और करोड़ों रुपये ऐंठ रहे हैं। यह सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है। डिजिटल अरेस्ट के एक मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पीड़ितों की समझ पर सवाल उठाए हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि आखिर लोग यह क्यों नहीं समझ पा रहे कि उनके साथ धोखाधड़ी हो रही है? क्या पीड़ित सामान्य लोग नहीं हैं, जबकि इस तरह के मामलों की खबरें लगातार मीडिया में आ रही हैं?
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले में हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने इस बात पर चिंता जताई कि लगातार सामने आ रहे मामलों के बावजूद लोग साइबर अपराधियों के झांसे में कैसे आ जा रहे हैं।
सुनवाई के दौरान इस मामले में कोर्ट की मदद कर रहे एमिकस क्यूरी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट से जुड़े स्कैम के मामले अब भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या पर काफी काम हुआ है, लेकिन ठगी की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। पुलिस भी इस बात को स्वीकार कर चुकी है।
एमिकस क्यूरी ने अदालत को बताया कि पिछले सप्ताह भी ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें एक महिला को 2.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
इस जानकारी पर चीफ जस्टिस ने हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में फंसने वाले लोग पढ़े-लिखे हैं। इसके बावजूद वे ठगों की बातों में आकर अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब डिजिटल अरेस्ट के मामलों की खबरें हर जगह दिखाई दे रही हैं, तब भी लोग सावधान क्यों नहीं हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं मीडिया में लगातार सामने आ रही हैं। इसके बावजूद लोग ठगों के झांसे में आ रहे हैं। अदालत की चिंता इस बात को लेकर है कि लोगों को जागरूक करने और ऐसे अपराधों के बारे में लगातार जानकारी दिए जाने के बाद भी समस्या बनी हुई है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले अपराधी अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई या दूसरी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते हैं। वे लोगों को किसी मामले में फंसाने, गिरफ्तारी करने या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
एमिकस क्यूरी ने अदालत को बताया कि उन्होंने सभी राज्यों की पुलिस से डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामलों की स्थिति बताने और इस समस्या से निपटने के लिए सुझाव देने को कहा है।
उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार ऐसी जानकारी मिल रही है कि कई कदम उठाए जाने के बाद भी डिजिटल अरेस्ट के मामले जारी हैं। पिछले सप्ताह तक इस तरह की ठगी की घटनाएं सामने आने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई। बता दें कि इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस जे. महादेवन की पीठ कर रही है।
डिजिटल अरेस्ट कोई वास्तविक कानूनी गिरफ्तारी नहीं है। यह साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें अपराधी वीडियो कॉल या फोन के जरिए लोगों को डराते हैं। वे दावा करते हैं कि पीड़ित किसी अपराध में शामिल है और जांच पूरी होने तक उसे निगरानी में रहना होगा।
Updated on:
29 Oct 2026, 3:06 PM IST
Published on:
29 Oct 2026, 3:06 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.