पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को उलुबेड़िया की चुनावी रैली में बड़ा बयान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग इस बार जानबूझकर मतदान और मतगणना को धीमा कर रहा है, ताकि तृणमूल कांग्रेस के एजेंट थक जाएं और घबरा जाएं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने शनिवार को एक बड़ा बम फोड़ा। उलुबेड़िया की चुनावी रैली में उन्होंने सीधे चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि इस बार मतदान और मतगणना को जानबूझकर धीमा रखा जाएगा, ताकि टीएमसी के एजेंट थक जाएं और घबरा जाएं।
ममता ने कहा- इस बार 'स्लो पोलिंग और स्लो काउंटिंग की पूरी तैयारी है। पहले यह खबर फैलाई जाएगी कि तृणमूल ज्यादातर सीटों पर पिछड़ रही है। यह सब हमारे एजेंटों का मनोबल तोड़ने की चाल है।
उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को साफ चेताया कि ऐसी किसी भी अफवाह से न घबराएं और न भटकें। ममता बोलीं- अगर BJP सूरज उगाती है तो तृणमूल सूरज डुबोना जानती है। 2021 से ज्यादा सीटें जीतेंगे, बस यह पक्का करो कि हर वोटर वोट डाल सके।
ममता ने EVM को लेकर भी गंभीर आशंका जताई। उन्होंने अपने मतगणना एजेंटों को हिदायत दी कि अगर कोई मशीन खराब हो तो उसे दुरुस्त करके दोबारा इस्तेमाल न करने दें।
उन्होंने कहा- मशीन में माइक्रोचिप फिट की जा सकती है। खराब मशीन की जगह नई मशीन की मांग करो, मरम्मत की नहीं। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि विपक्षी दल पिछले कई चुनावों से EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते आ रहे हैं।
इस बीच, आयकर विभाग और ED ने शुक्रवार को कोलकाता और आसपास के इलाकों में TMC के एक नेता, एक प्रत्याशी और ममता के नामांकन के प्रस्तावक के घर और दफ्तर पर छापे मारे। इस पर मुख्यमंत्री ने तीखा पलटवार किया।
उन्होंने कहा- केंद्रीय एजेंसियां कभी भाजपा, कांग्रेस या CPI(M) नेताओं के घर नहीं जातीं। बस तृणमूल को निशाना बनाया जाता है। लेकिन हम झुकने वाले नहीं हैं। मैं अकेली योद्धा नहीं हूं, मेरी माताएं और बहनें भी साथ हैं।
ममता ने भाजपा पर एक और तीखा तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता एक तरफ विदेशों में गोमांस निर्यात करके पैसा कमा रहे हैं और दूसरी तरफ बंगाल में मांसाहार पर प्रतिबंध लगाने की बात करते हैं। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब खान-पान की आजादी बंगाल में एक संवेदनशील चुनावी मुद्दा बन चुकी है।
ममता की इस रैली का लब्बोलुआब एक ही था कि डरो मत, डटे रहो। चाहे केंद्रीय एजेंसियों का दबाव हो, EVM की आशंका हो या चुनाव आयोग पर संदेह, TMC अपनी लड़ाई जारी रखेगी।