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‘विपक्ष को इसकी कीमत चुकानी होगी’, महिला आरक्षण बिल गिरने पर पीएम मोदी का फूटा गुस्सा, दे दी चेतावनी

Narendra Modi: लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल गिरने पर पीएम Narendra Modi ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े इस बिल को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, जिससे सियासी माहौल गरमा गया और सरकार ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 18, 2026

Narendra Modi

Narendra Modi(Image-ANI)

PM Modi On Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद से देश में सियासी पारा पूरी तरीके से गरम है। लोकसभा में शुक्रवार को एक महिला आरक्षण सहित अन्य 2 बिल लोकसभा में गिर गया, और इसके बाद सियासत का तापमान तेजी से बढ़ गया है। जिसके बाद से इसको लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। जानकारी के मुताबिक अब पीएम नरेंद्र मोदी ने इस पूरे घटनाक्रम पर खुलकर नाराजगी जताई है। खास बात यह है कि यह बिल महिलाओं के लिए आरक्षण से जुड़ा था, इसलिए मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया है।

प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर सीधा बोला हमला


मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में संसद भवन के भीतर हुई सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक में प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर सीधा हमला बोला। उनका कहना था कि विपक्ष ने एक ऐतिहासिक मौके को गंवा दिया है और इसके लिए उन्हें लंबे समय तक जवाब देना पड़ेगा। पीएम ने यहां तक कहा कि इस फैसले की राजनीतिक कीमत विपक्ष को चुकानी पड़ेगी। बताया जा रहा है कि बैठक में प्रधानमंत्री का लहजा काफी सख्त था। उन्होंने साफ कहा कि विपक्ष अब अपनी इस भूमिका को छिपाने की कोशिश करेगा, लेकिन सरकार इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी। उनका जोर इस बात पर था कि देश के हर गांव तक यह संदेश पहुंचे कि महिलाओं से जुड़े इस बिल को रोकने में विपक्ष की क्या भूमिका रही।

गिर गया था बिल


अब जरा समझते हैं कि आखिर यह 131वां संविधान संशोधन बिल था क्या। सरकार का मकसद तीन बड़े बदलाव करना था। पहला, लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 तक ले जाना। दूसरा, परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर 2011 की जनगणना के आधार पर तुरंत लागू करना। और तीसरा, महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को जमीन पर उतारना। लेकिन जब इस बिल पर वोटिंग हुई, तो मामला वहीं अटक गया जहां अक्सर ऐसे बिल अटकते हैं, संख्या के खेल में। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। सदन में 528 सांसद मौजूद थे, लेकिन समर्थन में केवल 298 वोट ही मिल सके। विरोध में 230 वोट पड़े। यानी जरूरी आंकड़े से करीब 54 वोट कम रह गए और बिल पास नहीं हो पाया।

बाकी दो बिल नहीं हुए पेश


बिल के गिरते ही सरकार ने भी अपना रुख बदल लिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कर दिया कि इससे जुड़े बाकी दो बिल परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित अब आगे नहीं बढ़ाए जाएंगे।

कुल मिलाकर, यह सिर्फ एक विधेयक का गिरना नहीं है, बल्कि आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनने वाला है। सरकार इसे महिला सशक्तिकरण से जोड़कर जनता के सामने रख रही है, जबकि विपक्ष अपनी अलग दलीलें दे रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होता दिख रहा है।