
पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर बागी गुट ने पूरी तरह कब्जा जमा लिया है। बागी विधायकों ने पार्टी की संस्थापक और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ही बेदखल कर दिया है।
उनकी जगह अरूप रॉय को टीएमसी अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के युवा चेहरे अभिषेक बनर्जी को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
यह फैसला बागी गुट की बैठक में लिया गया। 60 बागी विधायकों ने मिलकर यह कदम उठाया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के अंदरूनी कलह अब खुली जंग में बदल गई है। लंबे समय से चल रही असंतोष की आग अब फूट पड़ी है।
बैठक में नए पदाधिकारियों की घोषणा की गई। कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हाकिम, अरूप विश्वास और रथीन घोष को उपाध्यक्ष बनाया गया है। 30 सदस्यीय कमिटी में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी, संदीपन और जावेद खान को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ये बदलाव पार्टी के उन नेताओं ने किए हैं जो ममता बनर्जी के फैसलों से नाराज चल रहे थे। खासकर टिकट बंटवारे, परिवारवाद और संगठन में एकतरफा फैसलों को लेकर काफी गुस्सा था। बागियों का कहना है कि पार्टी को अब नई दिशा की जरूरत है।
कई जिला इकाइयों में बागी गुट पहले से सक्रिय था। ममता बनर्जी के करीबी नेताओं पर भी सवाल उठने लगे थे। आखिरकार बागियों ने बड़ी बैठक बुलाकर पूरे संगठन पर कब्जा कर लिया।
अरूप रॉय को चेयरमैन बनाए जाने को बागी गुट की बड़ी जीत माना जा रहा है। अरूप रॉय लंबे समय से पार्टी में सक्रिय हैं और कई बार विवादों में भी रहे हैं। अब देखना होगा कि यह नई कमान कितना वक्त टिक पाती है।
इस मामले में ममता बनर्जी के करीबी विधायक कुणाल घोष ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा- उनका यह कदम मां की पीठ में छुरा घोंपने' जैसा है। यह सही नहीं हुआ है।
वहीं, अभी तक इस मामले में ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पार्टी कार्यालय में भी सन्नाटा पसरा हुआ है।