राष्ट्रीय

चुनाव की तारीख के ऐलान से पहले CM ममता का ऐलान, पुजारियों और मुअज्जिनों के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी

Bengal Election: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले सीएम ममता बनर्जी ने इमाम, मोअज्जिन और हिंदू पुरोहितों का मानदेय बढ़ा दिया है। विपक्ष ने इसे टीएमसी का 'मुस्लिम कार्ड' और तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया है।

2 min read
Mar 15, 2026
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)

Mamata Banerjee : पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों (Bengal Election) के मद्देनजर राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। इसी कड़ी में राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बड़ा कदम उठाते हुए इमामों, मोअज्जिनों और हिंदू पुरोहितों के मासिक मानदेय (Honorarium) में बढ़ोतरी की घोषणा की है। कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित इमाम और मोअज्जिनों के एक विशाल सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने यह ऐलान किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अन्य विपक्षी दलों ने इस कदम को अल्पसंख्यक वोटों को साधने के लिए खेला गया 'मुस्लिम कार्ड' (Imam Honorarium)और तुष्टीकरण की राजनीति' करार दिया है।

किसका मानदेय कितना बढ़ा? (Imam Honorarium)

राज्य सरकार ने वक्फ बोर्ड के माध्यम से दिए जाने वाले भत्तों में 500 रुपये प्रति माह की एकमुश्त वृद्धि की है:

  • इमाम (Imams): अब तक इन्हें 2,500 रुपये प्रति माह मिलते थे, जो अब बढ़कर 3,000 रुपये हो गए हैं।
  • मोअज्जिन (Muezzins): इन्हें पहले 1,000 रुपये मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया गया है।
  • हिंदू पुरोहित (Hindu Priests): राजनीतिक संतुलन साधने के प्रयास में, राज्य के हिंदू पुरोहितों का भत्ता भी 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

विपक्ष का हमला: 'तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति' (TMC Muslim Card)

ममता बनर्जी की इस घोषणा के तुरंत बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले यह फैसला विशुद्ध रूप से राज्य के लगभग 30% अल्पसंख्यक वोट बैंक को लुभाने के लिए लिया गया है। भाजपा नेताओं ने इसे "सस्ती चुनावी चाल" बताते हुए कहा कि यह कदम साबित करता है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) तुष्टीकरण की राजनीति से बाहर नहीं आ पाई है। विपक्षी नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि जब राज्य वित्तीय संकट से जूझ रहा है और सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) लंबित है, तब खजाने पर यह अतिरिक्त बोझ क्यों डाला जा रहा है।

ममता बनर्जी का स्पष्टीकरण ( Mamata Banerjee's clarification)

विरोधियों के 'मुस्लिम कार्ड' वाले आरोपों पर पलटवार करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार धर्म के आधार पर भेदभाव में विश्वास नहीं करती। उन्होंने कहा, "जब मैं रमजान के दौरान इफ्तार में जाती हूं, तो मेरी तस्वीरों का मजाक उड़ाया जाता है। मैं हर धर्म का सम्मान करती हूं।"

राज्य सरकार की वित्तीय क्षमता सीमित

मानदेय में अधिक वृद्धि न कर पाने पर सफाई देते हुए मुख्यमंत्री ने इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सम्मेलन में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की वित्तीय क्षमता सीमित है क्योंकि केंद्र ने राज्य के 1.15 लाख करोड़ रुपये के बकाया को कथित तौर पर रोक रखा है, जिसके कारण वह चाहते हुए भी भत्ते में इससे ज्यादा की बढ़ोतरी नहीं कर सकतीं।

अन्य अहम घोषणाएं

मानदेय बढ़ाने के अलावा, मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक समुदाय को ध्यान में रखते हुए कुछ और महत्वपूर्ण ऐलान किए :

  • राज्य में 700 गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) मदरसों को राज्य सरकार द्वारा आधिकारिक मान्यता दी जाएगी।
  • अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए 5 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।

इस घोषणा के राजनीतिक मायने

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बंगाल में वामदलों, कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) जैसे दल लगातार अल्पसंख्यक वोटों में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के लिए अपने इस मुख्य कोर वोट बैंक को एकजुट रखना अनिवार्य है। मानदेय में यह बढ़ोतरी और मदरसों को मान्यता देने का फैसला उसी चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

Also Read
View All

अगली खबर