
TMC Faction: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखे एक नए पत्र में पक्षपात का आरोप लगाया है। बनर्जी ने कहा कि उनके गुट ने आयोग को निर्धारित 6 जुलाई की समय सीमा के भीतर अपनी टिप्पणियां प्रस्तुत कर दी थीं, जबकि प्रतिद्वंद्वी गुट को पहले 10 जुलाई और फिर 25 जुलाई तक का समय विस्तार दिया गया था।
उन्होंने कहा, दो बार समय विस्तार दिए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिलने से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि 6 जुलाई 2026 के हमारे पत्र में उल्लिखित हमारी सभी दलीलें और बयान स्वीकार कर लिए गए हैं और उनके पास इसका कोई जवाब नहीं है।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि प्रतिद्वंद्वी गुट उनके आरोपों का कड़ा खंडन करने के बावजूद “अपने मामले को मजबूत करने के लिए झूठे सबूत गढ़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग को लिख पत्र में कहा, हमारा दृढ़ विश्वास है कि आपके द्वारा दिए गए समय विस्तार के कारण, ऋतब्रता बनर्जी और अन्य लोग अपने मामले को मजबूत करने के लिए झूठे सबूत गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
क्योंकि उनके आरोपों में कोई दम नहीं है, जिनका हमने कड़ा खंडन किया है। कार्यवाही के शीघ्र समापन की मांग करते हुए बनर्जी ने कहा कि दोनों पक्षों को समान अवसर मिलने चाहिए।
उन्होंने कहा, चूंकि इस मामले के पश्चिम बंगाल में गंभीर राजनीतिक निहितार्थ हैं, इसलिए मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि आयोग के 2 जुलाई 2026 के पत्र में मांगी गई तारीख तक उन्हें अपनी टिप्पणियां प्रस्तुत करने के लिए कोई और समय दिए बिना जांच को जल्द से जल्द समाप्त करें।
यह विवाद 2 जुलाई को चुनाव आयोग तक पहुंचा, जब ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग से संपर्क कर खुद को असली एआईटीसी बताते हुए 22 जून को आयोजित विशेष सत्र में किए गए संगठनात्मक परिवर्तनों को मान्यता देने की मांग की थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने 2 जुलाई को ममता बनर्जी और ऋतब्रता बनर्जी दोनों को पत्र लिखकर प्रतिद्वंद्वी दावों पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी।