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Manan Mishra Resignation: कौन हैं मनन कुमार मिश्रा? NALSAR विवाद के बीच नाम सुर्खियों में, अब इस्तीफे की मांग ने बढ़ाई हलचल

NALSAR के छात्रों पर कार्रवाई को लेकर BCI का रुख कुछ ही समय में पूरी तरह बदल गया। अब चर्चा सिर्फ छात्रों की नहीं, बल्कि उस फैसले के केंद्र में रहे मनन कुमार मिश्रा की भूमिका और उनके लंबे कार्यकाल पर भी हो रही है।
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Aug 14, 2026
BCI Chairman Manan Mishra
BCI Chairman Manan Mishra :NALSAR के छात्रों पर कार्रवाई से क्यों मचा बवाल? BCI चीफ मनन मिश्रा के खिलाफ अब उठी इस्तीफे की आवाज (फोटो सोर्स:@MishraManan01)

BCI Chairman Manan Mishra: NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला कुछ ही घंटों में पलट गया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को सवालों के घेरे में ला दिया है। पहले छात्रों के नामांकन पर रोक का निर्देश, फिर उसे वापस लेना और अंत में पूरी कार्यवाही बंद करना घटनाक्रम तेजी से बदला। इसी बीच Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़े नेताओं ने मिश्रा के इस्तीफे की मांग उठाकर विवाद को नया राजनीतिक रंग दे दिया है।

Manan Mishra Resignation: NALSAR विवाद की शुरुआत आखिर हुई कैसे?

पूरा मामला NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच की आगामी दीक्षांत समारोह से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों के एक वर्ग ने उस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रस्तावित मुख्य अतिथि और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की भागीदारी को लेकर आपत्ति जताई थी। इसी घटनाक्रम के बाद BCI ने 13 अगस्त को एक कड़ा आदेश जारी कर दिया।

BCI के निर्देश में देश के सभी स्टेट बार काउंसिल से कहा गया कि वे NALSAR के 2026 में कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों का अधिवक्ता के तौर पर नामांकन अगले आदेश तक न करें। साथ ही विश्वविद्यालय से इस पूरे मामले पर तथ्यात्मक रिपोर्ट भी मांगी गई और कथित तौर पर अभियान शुरू करने, उसे संगठित करने या छात्रों को लामबंद करने वालों की पहचान करने को कहा गया।

यही फैसला विवाद का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। सवाल उठने लगा कि कुछ छात्रों के कथित विरोध के लिए पूरे graduating batch को पेशेवर करियर की शुरुआत में ही सामूहिक रूप से क्यों प्रभावित किया जाए।

फिर BCI ने अपना फैसला बदला

विरोध और आलोचना के बाद BCI ने कुछ ही समय में अपना रुख बदल दिया। परिषद ने स्पष्ट किया कि 2026 बैच के अधिकांश छात्र कथित अभियान से जुड़े नहीं थे और उन्हें किसी दूसरे के कृत्य के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी छात्रों को स्टेट बार काउंसिल में नामांकन का रास्ता फिर खोल दिया गया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। शुरुआत में BCI ने विश्वविद्यालय से रिपोर्ट लेकर कथित रूप से जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही थी। बाद में 13 अगस्त की रात BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने घोषणा की कि 2026 बैच के खिलाफ पूरी कार्रवाई ही बंद कर दी गई है। उनके मुताबिक परिषद इस निष्कर्ष पर पहुंची कि पूरे बैच की किसी तरह की गड़बड़ी या आंदोलन में भूमिका नहीं थी।

मिश्रा ने छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखते हुए अपनी बात सम्मानजनक तरीके से रखी जानी चाहिए।

Who is Manan Kumar Mishra : कौन हैं मनन कुमार मिश्रा?

NALSAR विवाद के बाद जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है मनन कुमार मिश्रा। वे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और लंबे समय से Bar Council of India यानी BCI के शीर्ष नेतृत्व में रहे हैं। BCI देश में वकालत के पेशे और कानूनी शिक्षा को विनियमित करने वाली प्रमुख वैधानिक संस्था है।

मिश्रा का संबंध बिहार के गोपालगंज से है। उन्होंने राजेंद्र कॉलेज, छपरा से बीएससी और पटना लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई की। पटना लॉ कॉलेज की आधिकारिक Alumni जानकारी भी उन्हें संस्थान के प्रमुख पूर्व छात्रों में शामिल करती है।

कानूनी करियर की शुरुआत उन्होंने बिहार में की और बाद में पटना हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर उनकी पहचान बनी और BCI की राजनीति में उनका प्रभाव लगातार मजबूत होता गया।

BCI चेयरमैन के तौर पर कितना मजबूत है उनका कद?

मनन कुमार मिश्रा का BCI में प्रभाव इस बात से समझा जा सकता है कि मार्च 2025 में वे लगातार सातवीं बार BCI चेयरमैन निर्विरोध चुने गए। BCI के मुताबिक, देशभर की करीब 27 लाख की कानूनी बिरादरी के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने उनके नेतृत्व पर फिर भरोसा जताया था।

सातवीं बार लगातार अध्यक्ष चुना जाना उन्हें BCI के सबसे लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले नेताओं में रखता है। यही वजह है कि NALSAR मामले में उनके एक आदेश के बाद उठे सवालों को महज एक स्थानीय विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा रहा।

वकालत से संसद तक का सफर

मनन कुमार मिश्रा का सार्वजनिक जीवन केवल कानूनी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। 2024 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार से राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया और वे निर्विरोध निर्वाचित हुए।

यानी उनकी पहचान एक साथ तीन स्तरों पर बनती है। वरिष्ठ अधिवक्ता, BCI के चेयरमैन और बिहार से BJP के राज्यसभा सांसद। यही राजनीतिक और पेशेवर भूमिकाओं का मेल भी समय-समय पर बहस का विषय रहा है।

Manan Mishra Resignation: अब CJP ने क्यों मांगा इस्तीफा?

NALSAR प्रकरण के बाद Cockroach Janta Party यानी CJP से जुड़े नेताओं ने मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। CJP से जुड़े सौरभ दास ने छात्रों पर कार्रवाई के फैसले पर सवाल उठाए और अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर मिश्रा के इस्तीफे की मांग का संकेत दिया। मीडिया रिपोर्टों में इसे BCI चेयरमैन के खिलाफ संभावित अभियान से जोड़कर देखा गया है।

CJP की आलोचना का केंद्र यह है कि छात्रों की असहमति को लेकर पूरे बैच को प्रभावित करने वाला आदेश कितना उचित था। संगठन से जुड़े लोगों ने BCI के कामकाज और उसके खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए; उपलब्ध रिपोर्टों में इनके आधार पर कोई स्वतंत्र निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

विवाद का असली सवाल क्या है?

NALSAR प्रकरण ने एक बड़ा संवैधानिक और संस्थागत सवाल खड़ा किया है—किसी छात्र की असहमति और पेशेवर भविष्य के बीच सीमा रेखा कहां खींची जाए?

कानून की पढ़ाई करने वाले छात्र आगे चलकर न्याय व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं। ऐसे में संवैधानिक पदों और संस्थाओं का सम्मान जरूरी है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल पूछने और असहमति व्यक्त करने की जगह भी महत्वपूर्ण है।

BCI का अंतिम फैसला फिलहाल छात्रों के पक्ष में गया है। 2026 बैच के खिलाफ कार्यवाही बंद कर दी गई है और छात्रों के करियर पर तत्काल कोई रोक नहीं है।

लेकिन कुछ घंटों के भीतर आया पहला आदेश, फिर उसका वापस लिया जाना और अंततः पूरी कार्यवाही खत्म करना यह सवाल जरूर छोड़ गया है कि इतनी बड़ी कार्रवाई का शुरुआती आधार कितना मजबूत था।

अब निगाहें मनन मिश्रा पर

NALSAR के छात्रों को राहत मिल गई है, लेकिन विवाद ने BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की कार्यशैली को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ उनके समर्थक लगातार सात बार BCI की कमान संभालने के रिकॉर्ड और लंबे कानूनी अनुभव को उनकी ताकत मानते हैं, तो दूसरी तरफ आलोचक NALSAR प्रकरण को लेकर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस्तीफे की मांग आगे किस रूप में बढ़ेगी। इतना जरूर है कि NALSAR विवाद ने छात्रों के भविष्य से शुरू हुई बहस को BCI की भूमिका, संस्थागत जवाबदेही और मनन कुमार मिश्रा के नेतृत्व तक पहुंचा दिया है।

Updated on:
14 Aug 2026 10:38 am
Published on:
14 Aug 2026 09:49 am
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